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Sagar in Gagar – 37

गागर में सागर – 31

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बड़े से बड़ा ज्ञानी भी
मन और बुद्धि में उलझ जाता है
क्या करूं-क्या न करूं में फंस जाता है
ऐसे में गुरु ही काम आते हैं
किसी न किसी को गुरु रूप में अवश्य मान कर चलो |

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