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सरकार का तीनों नगर निगमों को एक करने का फैसला सही या गलत ? आइए पढ़ते है कुछ राजनीतिज्ञों के विचार

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कैबिनेट ने लगाई मुहर- दिल्ली के तीनों निगम हुए एक  न्यूज डेस्क ( नेशनल थॉट्स ) : केंद्र सरकार द्वारा राजधानी में होने वाले MCD चुनावों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है | केंद्र ने दिल्ली के तीनों नगर निगमों को एक करने का फैसला ले लिया है | कैबिनेट ने इस फैसले पर मुहर लगा दी है | 

जहां MCD चुनावों को छोटा चुनाव कहके संबोधित किया जाता है | वहीं, सवाल ये है कि फिर निगम चुनावों को लेकर इतनी बड़ी राजनीति या विवाद क्यों ? उपराज्यपाल के आदेश पर टाले गए MCD चुनाव  

उपराज्यपाल के आदेश पर टाले गए MCD चुनाव  

दिल्ली के उपराज्यपाल के आदेशानुसार दिल्ली के तीनों नगर निगमों का चुनाव अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गए है |  दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दर्ज की है, संभावना यही है कि दिल्ली की जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों की जगह सरकारी अफसर कुछ समय तक दिल्ली में नगर निगम चलाएंगे, जो सीधे उपराज्यपाल की देखरेख में काम करेंगे, यानि अपरोक्ष रूप से केंद्र सरकार दिल्ली में नगर निगम चलाएगी |इस विषय पर राजनीतिक  गलियारे से क्या कह रहे है लोग ….

केंद्र ने उठाया सही कदम, दिल्ली के सुंदर भविष्य के लिए जरूरी – सुजीत ठाकुर  

सुजीत ठाकुर ( भाजपा से निगम पार्षद शालीमार बाग वार्ड – 61, अध्यक्ष पर्यावरण प्रबंधन सेवा समिति उत्तरी दिल्ली नगर निगम ) ने बताया कि केंद्र का ये फैसला राजधानी दिल्ली के भविष्य के लिए बहुत ही अहम है | निगम में जो त्रुटिया है उसको ठीक करना भी जरूरी है | नहीं तो, किसी कर्मचारी को तनख्वाह मिलेगी और एक निगम के कर्मचारियों को नहीं | अब पैसा एक जगह एकत्रित होगा, निगम का पैसा निगम के कार्यों में लगेगा | पहले जब तीनों निगम बटें हुए थे तब भी केंद्र ने 800 करोड़ रुपए दिए थे, ट्रैक्टर, बुलडोजर आदि के लिए | इस फैसले के बाद अब किसी भी सरकार से मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी | 

हर के डर से टाले जा रहे है चुनाव – संदीप भारद्वाज 

आम आदमी पार्टी दिल्ली प्रदेश ( ट्रेड विंग ) के महासचिव और CTI के उप-प्रधान संदीप भारद्वाज ने हमारे संवाददाता से बातचीत के दौरान बताया कि 1957 में नगर निगम का एक्ट बना था | इसमें फेर-बदल करने की जरूरत नहीं थी | पिछले 15 सालों से भाजपा के निगम पार्षद  दिल्ली MCD में काबिज है | इन्होंने सिर्फ दिल्ली को कुड़ें के ढेर में बदला है | इस बार MCD चुनाव में आम आदमी पार्टी का आना तय था | शायद इस डर ये फैसला लिया गया है | अगर भाजपा को अपनी हार का डर है तो अपने निगम पार्षदों से सवाल क्यों नहीं करते कि

उन्होंने जनता के लिए काम क्यों नहीं किया ? केंद्र का मकसद सिर्फ आम आदमी पार्टी को रोकना है ताकि बदलाव की राजनीति न आ पाए | 

केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण जनता को नहीं मिल पाता पूरा फायदा – रागिनी शर्मा 

पूर्व बुराड़ी विधानसभा प्रत्याशी व आप नेत्री रागिनी शर्मा ने बताया कि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है | जिस वजह से MCD और  कई मामलों को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार में टकराव जारी रहा है | दोनों सरकारें कर्मचारियों के वेतन या उन्हें नियमित करने को लेकर आमने-सामने आ चुकी है | आज जो फैसला लिया गया है उससे निगम को बहुत फायदा मिलेगा | पैसे की कमी नहीं होगी, भाजपा के पार्षदों की मनमानी खत्म होगी |

 केंद्र का एक और प्रयोग जारी, क्या इससे आम जनता को फायदा होगा – राजकुमार पाहवा 

राजकुमार पाहवा ( उद्यमी ) ने बताया कि MCD ने दिल्ली के विकास में क्या योगदान दिया है ? दिल्ली को तीन नगर निगमों में बांटने का प्रयोग बिल्कुल असफल रहा | साल 2012 में निगम को इसलिए बांटा गया था सभी काम सुचारू रूप से चल सके | लेकिन इन्होंने नए नियम बनाए | हर निगम का अपना मेयर हो | लेकिन इस सब से जनता का क्या फायदा हुआ | आज जो केंद्र ने फैसला लिया है वो भी एक तरह का प्रयोग ही है | अगर सफल हुआ तो ठीक नहीं तो दोबारा बदल दिया जाएगा | ऐसा कब तक चलेगा ? 

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