मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, देश की दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती अब समाप्त हो चुकी है। त्योहारों के दौरान बढ़ी हुई निजी खपत से घरेलू मांग को गति मिल रही है और मध्यकालीन परिदृश्य मजबूत बना हुआ है।
आरबीआई ने बताया कि 2024-25 की दूसरी तिमाही में आर्थिक सुस्ती अब पीछे रह गई है, जिसका कारण निजी खपत है। विशेष रूप से त्योहारों के दौरान खर्च में वृद्धि ने तीसरी तिमाही में वास्तविक गतिविधियों को बढ़ावा दिया। इसके परिणामस्वरूप, वृहद आर्थिक बुनियाद की ताकत पुनः स्थापित हो रही है।
आरबीआई के अनुसार, भारत में आर्थिक गतिविधियों में सुधार के कई संकेत हैं। लेख में यह भी कहा गया है कि कृषि क्षेत्र में सुधार और खरीफ फसल के रिकॉर्ड उत्पादन के कारण ग्रामीण मांग में भी वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही रबी फसल के अच्छे उत्पादन की संभावनाएं हैं, जो कृषि आय के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
औद्योगिक मोर्चे पर, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र में गतिशीलता बनी रहने की उम्मीद है। खासतौर से इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) अपनाने, अनुकूल नीतियों, सब्सिडी और बढ़ते बुनियादी ढांचे ने भारत को टिकाऊ परिवहन के क्षेत्र में अग्रणी बना दिया है। इसके साथ ही, स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिल रहा है।
सेवा क्षेत्र में विकास की गति बनी रहने की उम्मीद है, साथ ही मजबूत रोजगार सृजन और उपभोक्ता तथा कारोबारी भरोसा भी बना रहेगा। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के उतार-चढ़ाव के बावजूद वित्तीय स्थितियां अनुकूल बनी रहेंगी।
हालांकि, लेख में यह भी कहा गया है कि निजी निवेश अभी कमजोर बना हुआ है, विशेष रूप से कॉरपोरेट आय में कमी के कारण जुलाई-सितंबर 2024 के दौरान तिमाही आधार पर कम निवेश देखा गया।
आरबीआई ने स्पष्ट किया कि बुलेटिन में प्रकाशित लेख के विचार लेखकों के हैं और इसका केंद्रीय बैंक से कोई औपचारिक संबंध नहीं है।