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अजीत डोभाल की सऊदी यात्रा के बीच पाकिस्तान को झटका, सूडान डील टली, लीबिया करार पर संकट

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पश्चिम एशिया और अफ्रीका में तेजी से बदलते हालात के बीच भारत, पाकिस्तान और सऊदी अरब की रणनीतिक गतिविधियां एक-दूसरे से जुड़ी नजर आ रही हैं। अजीत डोभाल का सऊदी दौरा और पाकिस्तान का सूडान रक्षा समझौता रोकना, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत देता है।

सूडान रक्षा सौदा टला
पाकिस्तान ने सूडान को हथियार और लड़ाकू विमान देने से जुड़ा करीब 1.5 अरब डॉलर का समझौता फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह फैसला तब लिया गया जब सऊदी अरब ने इसके वित्त पोषण से हाथ खींच लिया।
बताया जा रहा है कि यह सौदा अंतिम चरण में था और इसकी मध्यस्थता भी सऊदी अरब ने ही की थी, लेकिन बाद में उसने अपनी रणनीति बदल दी।

सूडान में संघर्ष और सामरिक महत्व
सूडान पिछले तीन वर्षों से सेना और अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्स के बीच संघर्ष का सामना कर रहा है, जिससे गंभीर मानवीय संकट पैदा हुआ है।
लाल सागर के किनारे स्थित और सोने के बड़े उत्पादक देश के रूप में सूडान का सामरिक महत्व बेहद अहम माना जाता है।

सऊदी-यूएई की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
जहां सऊदी अरब सूडान की सेना के करीब माना जाता है, वहीं यूएई पर रैपिड सपोर्ट फोर्स को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में सऊदी का पीछे हटना संकेत देता है कि वह अफ्रीका में जटिल संघर्षों से दूरी बनाना चाहता है।

पश्चिमी देशों का दबाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ पश्चिमी देशों ने भी सऊदी अरब को अफ्रीका में प्रॉक्सी संघर्षों से दूर रहने की सलाह दी थी। मार्च में रियाद में हुई बैठक के बाद इस सौदे के वित्त पोषण को खत्म करने का फैसला लिया गया।

लीबिया समझौते पर भी संकट
इस घटनाक्रम का असर केवल सूडान तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान और लीबिया के बीच प्रस्तावित करीब 4 अरब डॉलर का रक्षा समझौता भी अब खतरे में बताया जा रहा है।

डोभाल का सऊदी दौरा और ऊर्जा सुरक्षा
दूसरी ओर, अजीत डोभाल का सऊदी अरब दौरा ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत की बड़ी मात्रा में तेल आपूर्ति खाड़ी देशों से आती है, इसलिए किसी भी व्यवधान का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

बदलता वैश्विक संतुलन
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम एक बड़े रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा करता है। सऊदी अरब अपनी क्षेत्रीय भूमिका को संतुलित कर रहा है, पाकिस्तान को रक्षा निर्यात में झटका लगा है और भारत ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीति के जरिए अपने हितों को मजबूत करने में जुटा है।
यह स्थिति बहुध्रुवीय प्रतिस्पर्धा और बदलते शक्ति संतुलन को दर्शाती है, जिसका असर आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल सकता है।

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