पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को लेकर अहम बयान दिया है। जर्मनी की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा के पहले दिन उन्होंने रक्षा एवं सुरक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति को संबोधित करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में अस्थिरता भारत के लिए सीधा खतरा बन सकती है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर जताई चिंता
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में किसी भी तरह का व्यवधान भारत के लिए दूर की बात नहीं, बल्कि एक गंभीर वास्तविकता है। इसका असर देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर सीधे तौर पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर पश्चिम एशिया पर निर्भर है।
नए सुरक्षा खतरों का दौर
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज दुनिया नए प्रकार के सुरक्षा खतरों का सामना कर रही है। तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों ने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक जटिल और आपस में जुड़ा बना दिया है। ऐसे में बदलते हालात के अनुसार नई रणनीति और दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग पर जोर
राजनाथ सिंह ने भारत और जर्मनी के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के बीच तालमेल बढ़ाना समय की मांग है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की भूमिका
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में 50 दिनों से अधिक समय से संघर्ष जारी है और उसके वैश्विक प्रभाव सामने आ रहे हैं। इस संदर्भ में राजनाथ सिंह का बयान भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं और रणनीतिक सोच को दर्शाता है।
आत्मनिर्भरता और सक्रिय भागीदारी की दिशा
रक्षा मंत्री के बयान से साफ है कि भारत अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और सुरक्षा व्यवस्था में एक सक्रिय और जिम्मेदार भागीदार के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। बदलते भू-राजनीतिक माहौल में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण संकेत भी है।