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After all, why 11, 21, 51 or 101 rupees are given in omen, since when is the tradition going?

आखिर क्यों शगुन में दिए जाते है 11, 21, 51 या 101 रुपये, कब से चली आ रही है परंपरा

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नेशनल थॉट्स स्पेशल : हिन्दू परंपरों के अनुसार कोई शादी हो या खुशी का कार्यक्रम ज्यादातर लोग शगुन में 11, 21, 51, 101 रुपये ही देता है | अपने यह बात अक्सर नोटिस की होगी लेकिन क्या आप इसके पीछे की वजह जानते है | आम तौर पर रिश्तेदार जितने भी पैसे दें, उसमें एक रुपए जोड़कर ही दिया जाता है लेकिन आखिर क्यों पैसों में एक रुपये जोड़कर दिया जाता है, यह जानना दिलचस्प होता है | ऐसे में जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर कब से यह परंपरा चली आ रही यही और इसके पीछे क्या कारण है और किस वजह से एक रुपये जोड़ने की परंपरा आ रही है :-
वैसे तो अलग-अलग मान्यताओं के अनुसार, इसके पीछे कोई खास और अहम तथ्य नहीं है, अधिकतर लोग सिर्फ परंपरा के हिसाब से ही ऐसा करते हैं | यानी लोग हमेशा से करते आ रहे हैं तो अब लोग इस ट्रेंड को फॉलो करते हैं और इसके पीछे कोई अहम कारण भी नहीं हैं | हालांकि, इसमें अगर रिसर्च की जाए तो कई तरह की चीजों से इस परंपरा को जोड़ा जाता है और माना जाता है कि इस वजह से ये एक रुपये जोड़े जाते हैं | आइए जानते हैं इस रुपये के पीछे क्या क्या बातें कही जाती है :-

प्राचीन काल से चली आ रही है परंपरा
ये तो आप भी देख रहे हैं कि कई पीढ़ियों से लोग इस परंपरा को अपनाते हुए आ रहे है | लेकिन, अगर इतिहास के पन्नों में नज़र डालें तो समझ आता है कि इसके पीछे क्या कारण होगा | दरअसल, कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पुराने दौर में किसी शुभ कार्य में 20 आना देने की परंपरा थी, जिसका मतलब है 1 रुपये और 25 पैसे यानी सवा रुपये | बता दें कि एक रुपये में 16 आने होते हैं और इसलिए ही 50 पैसे को अठन्नी और 25 पैसे को चवन्नी कहते थे  | यानी उस वक्त से ही कुछ बढ़ाकर देने की परंपरा है, जैसे 1 रुपये में कुछ बढ़ाकर दें तो सवा रुपये बन जाता है |

गुरुओं का मानना : शुभ-अशुभ का भी है कनेक्शन
अक्सर लोगों को मानना होता है कि किसी भी रकम में जीरो आने पर वो अंतिम हो जाता है | उसी तरह अगर रिश्ते में जीरो के आधार पर नेग देते हैं तो वो रिश्ता खत्म हो जाता है | ऐसे में 1 रुपये बढ़ाकर दिया जाता है | जीरो के अलावा हर अंक का सबसे कनेक्शन है, जैसे 7 का सप्त ऋषि, 9 का नौदेवी या नौग्रह आदि से है. इस वजह से एक जीरो को शुभ नहीं मानकर इसमें एक रुपये जोड़ दिया जाता है |

लोगों की सोच से भी है संबंधित
दरअसल, इसमें एक सोच का भी एंगल है | क्योंकि जब भी 51 रुपये देते हैं तो लगता है कि यह 50 से एक ज्यादा है, इसमें एक रुपये ज्यादा होने का अनुभव होता है | लेकिन अगर 59 दिए जाए तो लगता है कि यह 60 में एक रुपये है | यह एक बढ़ोतरी का अनुभव देता है, जिससे लगता है कि किसी व्यक्ति ने ज्यादा ही दिया है, इस वजह से भी एक रुपये को जोड़कर दिया जाता है |

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