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Bareilly professor couple adopts TB patients and gets them treated

बरेली के प्रोफेसर दंपति टीबी के मरीजों को गोद लेकर करवाते है इलाज

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अपने ऐसे लोग बहुत कम देखे होंगे जो बीमार लोगों की निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं, लेकिन चुनौती तब आती है, जब कोई ऐसी बीमारी हो जो संक्रामक हो और उसके फैलने का खतरा ज्यादा हो। टीबी यानी क्षय रोग जैसी । फिर भी उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले दंपति पीछे नहीं हटे।


बरेली के रहने वाले अमित वर्मा और उनकी पत्नी हेमा वर्मा टीबी के मरीजों को गोद लेकर उनका मुफ्त इलाज करवाते हैं। दंपत्ति एम.जे.पी. रुहेलखंड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। इन्होंने टीबी मरीजों को ढूंढने के लिए कई जगह कैंप भी लगाए।

उनकी इस पहल से अब तक 100 लोग जुड़ चुके हैं, जो अब तक 250 टीबी मरीजों को गोद ले चुके हैं। इन मरीजों की मुहिम से जुड़े लोग हर 15 दिन में फोन करते हैं और उनका हाल जानते हैं। इसके अलावा उनसे कुछ सवाल करते हैं कि कुछ समस्या या दवाई अगर वक्त पर नहीं पहुंच रही है तो मदद करते हैं। ये मुहिम यहीं नहीं रुकी, बल्कि इस से बरेली के आईपीएस अधिकारी से लेकर कई प्रशासनिक अधिकारी तक जुड़ चुके हैं। 

 
सरकार ने भारत को टीबी मुक्त करने के लिए 2025 तक का लक्ष्य रखा है और अगर इसी भावना के साथ लोग आगे आकर काम करते रहे तो हमारा देश जल्द ही टीबी से मुक्त जरूर हो जाएगा ।

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