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Entertainment News : Dharm Yoddha Garud : Sony SAB's new show from the perspective of life and religion!

Entertainment News : Dharm Yoddha Garud : जीवन और धर्म के दृष्टिकोण से प्रस्तुत है सोनी सब का नया शो !

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सोनी सब के नए सीरियल ” धर्म योद्धा गरुड़ ” के शुरुआत कब  
 
न्यूज डेस्क ( नेशनल थॉट्स ) : सोनी सब चैनल अपने आगामी सीरियल ‘धर्म योद्धा गरुड़’ के TRP कई रेस में वापिस दौड़ना चाहता है | पिछले कुछ सालों में बड़ी ही सहजता के साथ कामयाबी की सीढ़ियाँ चढ़ रहा चैनल दुनिया में धूम मचाने के लिए तैयार है | सर्वशक्तिमान गरुड़ और उनकी मां के बीच नि:स्‍वार्थ प्‍यार की कहानी दिखाने के लिए, सोनी सब हमारे लिये वह पौराणिक गाथा लेकर आया है | 
 
 
महानतम गाथा देखने से पहले आइयें जानते हैं गरुड़ के बारे में कुछ रहस्यमयी बातें :-
 

  • शक्ति और साहस का मानस स्वरूप

भारतीय पुराणों में गरुड़ को शक्ति का प्रतीक बताया गया है | उनके पास बाज जैसी नजर है और उनके पंख इतने शक्तिशाली हैं कि ब्रह्मांड की चाल तक को बदल सकते हैं | उनका कौशल, साहस और चातुर्य देखकर देवता और दानव, दोनों ही प्रभावित और चिंतित हो जाते हैं |

  • मां और बेटे का सदाबहार रिश्ता

इतना मजबूत सबंध कि दूर बैठे हुए भी एक-दूसरे के मन को पढ़ सके और जिसमें कोई बात समझाने की आवश्यकता न हो | अपनी ही बहन कदरू की दासता की बेड़ियों में जकड़ीं विनता अपने दुर्भाग्‍य के बंधन में हैं | लेकिन गरुड़ के दिल और आत्‍मा में उनकी माँ बसी हैं और वे सर्पों की माता कदरू के चंगुल से अपनी माँ को मुक्‍त करना अपना निजी मिशन बना लेते हैं |

  • गरुड़ के जीवन का उल्लास और उद्देश्य

गरुड़ का जन्म सभी जीवित प्राणियों के जनक महान ऋषि कश्यप और विनता के पुत्र के रूप में हुआ था | ऋषि कश्यप अपने बच्चों से निराश थे, क्योंकि एक ओर जहां असुर देवताओं के विरूद्ध षड्यंत्र रचने में व्‍यस्‍त थे, वहीं दूसरी ओर देवता अपने उद्देश्य से भटक गये थे और शक्ति के मद में चूर थे | तब ऋषि कश्‍यप ने भगवान ब्रह्मा से प्रार्थना की कि उन्हें संपूर्ण व्यक्तित्व वाला पुत्र चाहिए | 

 
 
धर्म योद्धा गरुड़ का जन्म 
 
जिसके बाद गरुड़ का जन्म हुआ, जो पक्षियों के राजा हैं | उन्होंने अपना संपूर्ण अस्तित्व निःस्वार्थता, सत्‍यनिष्‍ठा, आज्ञापालन और साहस को समर्पित कर दिया और वे सच्चे अर्थों में ‘धर्म योद्धा गरुड़’ बने |

  • भगवान विष्णु के वाहन

गरुड़ को लोभ कभी छू नहीं पाया और उन्होंने अपनी सत्‍यनिष्‍ठा से समझौता किए बिना अपने शत्रुओं से युद्ध किया | वे केवल अपनी मां को न्याय दिलाना चाहते थे | उनकी शक्ति और उत्तरदायित्व के गुण देखकर ब्रह्मांड के पालक और संरक्षक भगवान विष्णु ने उन्हें अपना निजी सारथी बनने का सम्मान दिया, उन्हें अमरता दी और इस प्रकार हमारे पौराणिक ग्रंथों में वे हमेशा के लिये स्थापित हो गए |

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