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Ganesh Chaturthi 2021: Do you know why modak is offered to Ganpati

Ganesh Chaturthi 2021 : क्या आप जानते है गणपति को क्यों लगाया जाता है मोदक का भोग

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नेशनल थॉट्स स्पेशल : हिन्दू धार्मिक कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद का महीना चल रहा है | यह हम आपको इसलिए बता रहे है क्योंकि इसी महीने का लोगों को इंतज़ार रहता है | देश के कई हिस्सों में काफी हर्षउल्लास के साथ गणेश चतुर्थी का उत्सव मनाया जाता है |  ये उत्सव भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक चलता है | इसलिए इस शुभ महूरत को गणेश जी की मूर्तियाँ स्थापित की जाती है | इस दौरान भगवान गणेश के भक्त प्रतिमाओं को धूमधाम से घर में लेकर आते हैं | उनकी स्थापना करने के बाद गणपति की सेवा करते हैं, मेवा, मिष्ठान और उनके पसंदीदा भोग लगाते हैं |

इस बार गणेश उत्सव 10 सितंबर से शुरू होने जा रहा है और 19 सितंबर तक चलेगा | इस अवसर पर लोग गणपति को 5, 7 या 9 दिनों के लिए घर पर लेकर आते हैं | गणेश उत्सव की धूम सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में होती है | वहां लोग गणपति को मोदक का भोग जरूर लगाते हैं | मोदक को नारियल और घी से बनाया जाता है | मान्यता है कि गणपति को मोदक अत्यंत प्रिय है | आइए जानते है इसके पीछे क्या है वजह :-

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पहली कथा

गणेश जी को मोदक प्रिय है और इसके पीछे कई तरह की बातें प्रचलित हैं | पहली कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव शयन कर रहे थे और द्वार पर गणेश जी पहरा दे रहे थे | परशुराम वहां पहुंचे तो गणेश जी ने परशुराम को रोक दिया | इस पर परशुराम क्रोधित हो गए और गणेश जी से युद्ध करने लगे | जब परशुराम पराजित होने लगे तो उन्होंने शिव जी द्वारा दिए परशु से गणेश जी पर प्रहार कर दिया |
इससे गणेश जी का एक दांत टूट गया | दांत टूट जाने की वजह से उन्हें काफी दर्द हुआ और खाने-पीने में परेशानी होने लगी | तब उनके लिए मोदक तैयार किए गए क्योंकि मोदक काफी मुलायम होते हैं | मोदक खाने से उनका पेट भर गया और वे अत्यंत प्रसन्न हुए | तब से मोदक गणपति का प्रिय व्यंजन बन गया | मान्यता है कि जो भी उन्हें मोदक का भोग लगाता है, गणपति उससे अत्यंत प्रसन्न होते हैं |

आइए जानते है दूसरी कथा के बारे में :- 
मोदक को लेकर दूसरी कथा गणेश और माता अनुसुइया की है | कहा जाता है कि एक बार गणपति पिता भगवान शिव और माता पार्वती के साथ अनुसुइया के घर गए | उस समय गणपति, भगवान शिव और माता पार्वती तीनों को काफी भूख लगी थी | माता अनुसुइया ने सोचा कि पहले गणेश जी को भोजन करा देती हूं, इसके बाद महादेव और माता पार्वती को खिला दूंगी | माता अनुसुइया ने गणपति को भोजन कराना शुरू किया तो वो लगातार काफी देर तक खाते ही रहे |
लेकिन उनकी भूख शांत होने का नाम नहीं ले रही थी | तब माता अनुसुइया ने सोचा कि कुछ मीठा खिलाने से शायद उनकी भूख शांत हो जाए | ऐसे में माता अनुसुइया गणपति के लिए मिठाई का एक टुकड़ा लेकर आईं | उसे खाते ही गणेश जी का पेट भर गया और उन्होंने जोर से डकार ली | उसी समय भोलेनाथ ने भी जोर-जोर से 21 बार डकार ली और कहा उनका पेट भर गया है |
बाद में देवी पार्वती ने अनुसृइया से उस मिठाई का नाम पूछा | तो माता अनुसुइया ने बताया कि इसे मोदक कहा जाता है | तब से मोदक को गणपति का प्रिय व्यंजन माना जाने लगा और भगवान गणेश को मोदक चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई | मान्यता है कि गणेश जी को यदि 21 मोदक चढ़ाए जाएं तो उनके साथ सभी देवताओं का पेट भर जाता है | इससे गणपति और अन्य सभी देवी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है |

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