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Holistic Health Tips, Arogya Sevak - Mukesh Babu Gupta

होलिस्टिक हेल्थ टिप्स, आरोग्य सेवक ” मुकेश बाबू गुप्ता

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हमारा इंसानी शरीर एक ऐसी जैविक घड़ी के हिसाब से चलता है, यह आपके जगने-सोने के समय, हार्मोन के स्राव, शरीर के तापमान सहित विभिन्न शारीरिक प्रकियाओं को नियंत्रित करता है और पाचन क्रिया में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। इसे मेडिकल की भाषा में ‘शरीर घड़ी’ या ‘जैवलय’, ‘जैविक घड़ी’ कहते हैं. अंग्रेजी में इसे ‘body clock’, circadian rhythms, Biological rhythms या Biological rhythms कहते है। ये घड़ी हमारे शरीर के दिमागी हिस्से हाइपोथैलेमस में पाई जाती है I

बॉडी क्लॉक से हमारे शरीर की जैविक क्रियाओं का पता चलता है. जीव-जंतुओं सहित सभी जीवित प्राणियों के भीतर शारीरिक प्रक्रियाओं में चलने वाला 24 घंटे का चक जिससे कई बीमारियों के इलाज में मदद मिल सकती है. खासतौर से नींद से संबंध‍ित परेशानियों में बेहद कारगर होती हैI

Biological Clock (जैविक घड़ी) of Human Body

प्रातः 3 से 5 – ( जीवनी शक्ति विशेषरूप से फेफ़डों में होती है ) थोड़ा गुनगुना पानी पीकर खुली हवा में घूमना एवं प्राणायाम करना । शरीर स्वस्थ व स्फूर्तिमान होता है । ब्राह्ममुहूर्त में उठनेवाले लोग बुद्धिमान व उत्साही होते हैं और सोते रहनेवालों का जीवन निस्तेज हो जाता है ।

प्रातः 5 से 7 – ( बड़ी आँत में ) प्रातः जागरण से लेकर सुबह 7 बजे के बीच मल-त्याग एवं स्नान कर लेना चाहिए । सुबह 7 बजे के बाद जो मल-त्याग करते हैं उन्हें अनेक बीमारियाँ होती हैं ।

सुबह 7 से 9 – ( अमाशय यानी जठर में ) इस समय ( भोजन के 2 घंटे पूर्व ) दूध अथवा फलों का रस या कोई पेय पदार्थ ले सकते हैं ।

9 से 11 – ( अग्न्याशय व प्लीहा में ) यह समय भोजन के लिए उपयुक्त है । भोजन के बीच-बीच में गुनगुना पानी ( अनुकूलता अनुसार ) घूँट-घूँट पीयें ।
दोपहर 11 से 1 – ( हृदय में ) दोपहर 12 बजे के आसपास मध्याङ्घ-संध्या करने का हमारी संस्कृति में विधान है । भोजन वर्जित ।

दोपहर 1 से 3 – ( छोटी आँत में ) भोजन के करीब 2 घंटे बाद प्यास-अनुरूप पानी पीना चाहिए । इस समय भोजन करने अथवा सोने से पोषक आहार-रस के शोषण में अवरोध उत्पन्न होता है व शरीर रोगी तथा दुर्बल हो जाता है ।

दोप. 3 से 5 – ( मूत्राशय में ) 2-4 घंटे पहले पिये पानी से इस समय मूत्र-त्याग की प्रवृत्ति होगी ।

शाम 5 से 7 – ( गुर्दे में ) इस समय हलका भोजन कर लेना चाहिए । सूर्यास्त के 10 मिनट पहले से 10 मिनट बाद तक (संध्याकाल में) भोजन न करें । शाम को भोजन के तीन घंटे बाद दूध पी सकते हैं ।

रात्रि 7 से 9 – ( मस्तिष्क में ) इस समय मस्तिष्क विशेष रूप से सक्रिय रहता है । अतः प्रातःकाल के अलावा इस काल में पढ़ा हुआ पाठ जल्दी याद रह जाता है ।

रात्रि 9 से 11 – ( रीढ़ की हड्डी में स्थित मेरुरज्जू में ) इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांति प्रदान करती है । इस समय का जागरण शरीर व बुद्धि को थका देता है ।

रात्रि 11 से 1 – ( पित्ताशय में ) इस समय का जागरण पित्त-विकार, अनिद्रा, नेत्ररोग उत्पन्न करता है व बुढ़ापा जल्दी लाता है । इस समय नई कोशिकाएँ बनती हैं ।

1 से 3 – ( यकृत में ) इस समय का जागरण यकृत (लीवर) व पाचन तंत्र को बिगाड़ देता है । ऋषियों व आयुर्वेदाचार्यों ने बिना भूख लगे भोजन करना वर्जित बताया है । अतः प्रातः एवं शाम के भोजन की मात्रा ऐसी रखें, जिससे ऊपर बताये समय में खुलकर भूख लगे ।
– ऐसे बिठाएं बॉडी क्लॉक से तालमेल –

 

1. हर दिन एक ही समय पर उठें :-
अच्छी नींद की शुरुआत दरअसल सुबह से ही हो जाती है। जिस वक्त आंखें खुलती हैं और रोशनी आंखों के पीछे की नसों तक पहुंचती है, बॉडी क्लॉक ऑन हो जाती है। इसी के साथ दिमाग से तरह-तरह के हॉर्मोन का निकलना शुरू हो जाता है। सूरज की रोशनी दिमाग को सक्रिय करती है। इसी से बॉडी क्लॉक और शरीर के बीच तालमेल स्थापित होता है।

2. नींद खुले तो उठ जाएं :-
बीच रात में नींद खुल गई तो बिस्तर पर करवटें बदलते रहने से कोई फायदा नहीं। बेहतर होगा कि बिस्तर छोड़ दें और तब तक कुछ पढ़ें या फिर कोई और काम करें, जब तक कि दोबारा नींद न आ जाए। बिस्तर पर करवटें बदलते रहने से दिमाग को सही संदेश नहीं पहुंच पाता और वह यह तय नहीं कर पाता कि उसे पूरी तरह से सक्रिय हो जाना है या अभी आराम करना है।

3. वीकेंड गिफ्ट से सावधान :-
सप्ताह के आखिरी दिनों में देर रात तक जागना और सुबह देर तक सोना, हमें किसी लग्जरी से कम नहीं लगता, पर खुद को यह छोटा-सा गिफ्ट देना बॉडी क्लॉक के साथ अत्याचार करने जैसा है। इससे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है।

4. बेवक्त न सोएं :-
अगर आप अपनी बॉडी क्लॉक से सही तालमेल बिठाना चाहते हैं तो बेवक्त सोने से बचें। अगर नींद आए, तब भी गलत वक्त पर न सोएं। सोने के सही वक्त मतलब रात 9 बजे के आसपास ही बिस्तर पर जाएं। 5. सूरज का सामना करें :-
चूंकि बॉडी क्लॉक का सीधा संबंध सूरज की रोशनी से है इसलिए सुबह उठने पर खिड़की के परदे खोल कर सूरज की रोशनी को चेहरे पर आने दें। इससे दिमाग में बॉडी क्लॉक को लेकर मेसेज तेजी से पहुंचेगा और क्लॉक को सही होने का वक्त मिलेगा। बेहतर होगा कि सोकर उठने के बाद मोबाइल की स्क्रीन देखने से पहले सूरज की रोशनी का सामना करें।

6. रात में रोशनी से बचें :-
रात में शरीर सोने की तैयारी कर रहा होता है। ऐसे में अगर आंखों पर तेज रोशनी पड़ेगी तो दिमाग में यही मेसेज जाएगा कि अभी सोने का वक्त नहीं आया है। मोबाइल आदि डिवाइसेज को रात में सोने से पहले तकरीबन 2 घंटे पहले ही देखना बंद कर दें। इससे बॉडी क्लॉक धीरे-धीरे सही होने लगेगी। वैसे भी मोबाइल की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट अनिद्रा को बढ़ाने का काम करती है।

7. रात में एक्सरसाइज से बचें :-
किसी भी हाल में शाम 7 बजे के बाद एक्सरसाइज न करें। इस वक्त बॉडी क्लॉक के हिसाब से दिमाग शरीर को ऐक्टिविटी धीमी करने का मेसेज भेजने लगता है और ऐसे में एक्सरसाइज करना दिमाग और शरीर के बीच कंफ्यूजन पैदा करेगा और इससे बॉडी क्लॉक से तालमेल बिगाड़ सकता है।

8. रात में चाय-कॉफी-शराब से बचें :-
चाय और कॉफी कैफीन और शराब एल्कोहल के जरिए शरीर को ऐक्टिव बने रहने के लिए लगातार उकसाते रहते हैं। शाम को 6 बजे के बाद किसी भी तरह ऐसा ड्रिक लेने से बचें जो शरीर को ऐक्टिव करने का काम करे।

9. जितना हो सके रिदम में रहें :-
हो सकता है कि पूरी तरह से बॉडी क्लॉक को फॉलो करना मुमकिन न हो सके लेकिन जितना हो सके इसे फॉलो करें। अगर ड्यूटी ईवनिंग शिफ्ट की है तो डिनर सही वक्त यानी 7-8 बजे के बीच कर लें।

10. नाइट शिफ्ट से बचें :-
नाइट शिफ्ट करना बॉडी क्लॉक पर सबसे बड़ा जुल्म है। हालांकि यह वक्त की जरूरत हैं। नाइट शिफ्ट लगातार करने से भी बुरा है बार-बार शिफ्ट का बदलना। अगर 3 महीने में 1 महीने के लिए नाइट शिफ्ट करना पड़े तो हर दूसरे महीने नाइट शिफ्ट करने से बेहतर है।

निरोग हेल्थ केयर
“आरोग्य सेवक और मित्र “
मुकेश बाबू गुप्ता
-:संपर्क करे:-9560355455

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