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Holistic Health Tips, Arogya Sevak - Mukesh Babu Gupta

होलिस्टिक हेल्थ टिप्स, रोग होने के कारण,आरोग्य सेवक- मुकेश बाबू गुप्ता

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• अंतरात्मा की आवाज के विरुद्ध कार्य करना ।  शरीर में रोग*-प्रतिरोधक शक्ति व खनिज तत्त्वों की कमी • अनिश्चित समय पर भोजन करना, भूख न होने पर भी खाना, बिना चबाए जल्दी-जल्दी खाना तथा भूख होने पर भी नहीं खाना।
*विरूद्ध आहार का सेवन* जैसे दूध और प्याज, उड़द दाल और दही, खीरा और दही, दूध और दही, दूध और कटहल, घी और शहद एक साथ खाना तथा रात्रि भोजन के तुरंत बाद सोना । ईर्ष्या, भय, उत्तेजना, क्रोध, चिंता, शोक, घृणा तथा तनाव की स्थिति में भोजन करना। *भूख से अधिक तथा बार-बार खाना* → चाय, कॉफी, मदिरा, तंबाकू, मांस, मछली, अण्डा, बर्गर, पिज्जा, ब्रेड तथा चाऊमीन आदि हानिकारक पदार्थों का सेवन करना । शारीरिक श्रम का अभाव* असंयमित जीवन, रात्रि को देर से सोना, प्रात देर से उठना मुँह से साँस लेना और मानसिक विषाद ।
शरीर के दुश्मन चार सफेद जहर
*रिफाइन्ड तेल व डालडा* : तेल को रिफाइन्ड बनाने के लिए जहरीले केमिकल्स का प्रयोग किया जाता है। फलस्वरूप तेल के सारे महत्त्वपूर्ण घटक नष्ट हो जाते हैं। रिफाइन्ड तेल खाने से हमें दो बड़े नुकसान होते है -एक तो शुद्ध तेल से जो कुछ पौष्टिकता हमें मिलनी चाहिए वह नहीं मिल पाती तथा दूसरा, विभिन्न प्रकार के खतरनाक रसायन हमारे शरीर में जाने से कई घातक रोग होते हैं, जैसे बी.पी., हृदयाघात, पारालाइसिस, ब्रेन हेमरेज, पार्किन्सन, अर्थराइटिस, संधिवात, कमर दर्द। डालडा को पचाने के लिए शरीर का तापमान 108°F होना चाहिए, जो संभव नहीं है।
अत: अपने क्षेत्र के उत्पादन के अनुसार ही सरसों, तीसी, मूँगफली, नारियल, तिल आदि का कच्ची घानी से निकाला हुआ तेल खाए तथा आजीवन स्वस्थ रहे।
*सफेद नमक* : आयोडाइज्ड नमक में 98% सोडियम क्लोराइड पाया जाता है, जिससे कई रोग होते है. जैसे नपुंसकता, जोड़ों का दर्द, गठिया, थायराइड, बी.पी., पारालाइसिस, ब्रेन हेमरेज। सेंधा नमक में 94 जबकि सफेद नमक में मात्र 3 सूक्ष्म पोषक तत्त्व होते हैं। सफेद नमक की जगह संधा नमक के सेवन से शरीर को बहुत सी बीमारियों से बचाया जा सकता हैI
*चीनी*: चीनी, यानी मीठा जहर। यह शरीर में अम्ल पैदा करती है I जो भोजन के पाचन में बाधा डालता है और डायबिटीज की ओर ले जाता है। चीनी में किसी भी प्रकार का प्रोटीन, विटामिन या सूक्ष्म पोषक तत्त्व नहीं होता: उसमें केवल मीठापन होता है. जा शरीर के किसी काम में नहीं आता। इसलिए चीनी की जगह गुड, काकवी, मिश्री या खाँड़ का प्रयोग करें। चीनी खाना भूल जाए।
*मैदा* : यह आँतों में चिपकता है, कफ के संतुलन को बिगाड़ता है आर कब्ज पैदा करता है। कब्ज सभी बीमारियोंकी जननी है। अत समासा कचौड़ी आदि कभी न खाएं. न ही किसी को खिलाए।
      *निरोग हेल्थ केयर*
   “आरोग्य सेवक और मित्र “
         मुकेश बाबू गुप्ता
-:संपर्क करे:-9560355455

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