YOU MUST GROW INDIA MUST GROW

National Thoughts

A Web Portal Of  Positive Journalism

Infosys Award winning Professor Suman Chakraborty from IIT Kharagpur brings affordable technologies to resource-poor areas

आईआईटी खड़गपुर से इंफोसिस पुरस्कार विजेता प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती संसाधन विहीन क्षेत्रों के लिए सस्ती ​​​​लेकर आए तकनीकें  

Share This Post

50% LikesVS
50% Dislikes

प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती, जिन्होंने हाल ही में अपने समूह के साथ इंफोसिस पुरस्कार प्राप्त किया है, की कई प्रौद्योगिकियां सामुदायिक स्वास्थ्य-कर्मियों को कतार के अंत में खड़ी दूरस्थ क्षेत्रों की जनसंख्या को स्वास्थ्य-सहायता प्रदान करने में मदद कर रही हैं। उनकी पहल को विशेष रूप से हाल की महामारी द्वारा शुरू (ट्रिगर) किया गया है।

संक्रामक रोग का पता लगाने के लिए एक न्यूक्लिक-एसिड आधारित त्वरित नैदानिक परीक्षण ( रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट) जिसे कोविरैप ( सीओवीआईआरएपी ) कहा जाता है, संक्रामक रोगों के परीक्षण के लिए संसाधन-गहन आरटी – पीसीआर का विकल्प है। इस प्रौद्योगिकी को कई कंपनियों और संगठनों को हस्तांतरित किया गया है। हार्डवेयर को बदलने की आवश्यकता के बिना विशिष्ट परीक्षण प्रोटोकॉल के अनुसार इस उपकरण ( डिवाइस ) को उपयुक्त रूप से अनुकूलित और प्री-प्रोग्रामिंग करके किसी भी संक्रामक रोग का पता लगाने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है ।

कागज की पट्टी ( पेपर स्ट्रिप ) उंगली में सुई चुभाकर निकाले गए रक्त ( फिंगर-प्रिक ब्लड ) के साथ नैदानिक परीक्षण ( डायग्नोस्टिक्स ) के लिए एक बहुत ही कम मूल्य ( अल्ट्रा-लो-कॉस्ट) त्वरित जांच करने वाला यह उपकरण ( रैपिड एक्सट्रीम पॉइंट-ऑफ-केयर डिवाइस ) एक स्मार्ट फोन आधारित एप के माध्यम से मात्रात्मक रूप से प्लाज्मा ग्लूकोज, हीमोग्लोबिन, क्रिएटिनिन और लिपिड प्रोफाइल को सुई से पेपर-स्ट्रिप पर एकत्रित उंगली से निकाले गए रक्त ( फिंगर-प्रिक ब्लड ) से माप सकता है। ठीक वैसे ही जैसे एक क्रेडिट कार्ड कार्ड रीडर के साथ इंटरफेस करता है, वैसे ही पेपर स्ट्रिप परीक्षण के परिणाम प्राप्त करने के लिए हाथ से पकड़े जाने वाले डिवाइस के साथ सम्पर्क ( इंटरफेस ) करती है। इसका उपयोग जमीनी स्तर पर कई गैर-संचारी रोगों की सामूहिक जांच के लिए किया जा सकता है।

(https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image002KF2X.png https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image003P5MQ.png

 

तापीय छायांकन ( थर्मल इमेजिंग ) और विश्लेषण ( एनालिटिक्स ) से ऊतक की रक्त प्रवाह दर में मापे गए परिवर्तनों के आधार पर मुंह के कैंसर की शुरुआती जांच के लिए एक कम लागत वाली साथ में ले जाने योग्य ( पोर्टेबल) हाथ में पकड़े जा सकने वाले उपकरण ( हैंड-हेल्ड इमेजिंग डिवाइस ) श्री चक्रवर्ती के समूह द्वारा विकसित की गई है। इसके लिए किसी चिकित्सकीय अवसंरचना ( क्लिनिकल इंफ्रास्ट्रक्चर ) की जरूरत नहीं है। इस पोर्टेबल डिवाइस का उपयोग प्रारंभिक जोखिम मूल्यांकन और मौखिक कैंसर के चरणों के वर्गीकरण के लिए किया जा सकता है और इस पद्धति को कैंसर के अन्य रूपों तक बढ़ाया जा सकता है। इस उपकरण ( डिवाइस ) ने पहले चरण के चिकित्सकीय परीक्षण ( क्लीनिकल ट्रायल ) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और अब यह क्षेत्रीय प्रयोग प्रारूप ( फील्ड ट्रायल मोड ) में प्रवेश कर गया है।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image004HPXU.png

 

उन्होंने एक हाथ से चलने वाली ( पोर्टेबल ) स्पिनिंग डिस्क भी विकसित की है जो शारीरिक द्रव की केवल एक बूंद से शरीर के कई द्रव-आधारित नैदानिक मानकों ​​​​( पैरामीटरों ) पर परीक्षण करने में सक्षम है। इस प्लेटफॉर्म का उपयोग करके पूर्ण रक्त गणना ( सीबीसी ) को मापने की तकनीक को डिजाइन और मान्य किया गया था। परीक्षण के परिणामों को पढ़ने के लिए एक वैद्युत रासायनिक (इलेक्ट्रोकेमिकल ) सेंसर को एकीकृत किया गया है। इसे नैदानिक ( डायग्नोस्टिक ) परीक्षण के लिए प्रयोगशाला सेंट्रीफ्यूज के विकल्प के रूप में डिजाइन किया गया है।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image005CNQJ.png

 

इस समूह ने ऐसे एंटीबायोटिक प्रतिरोध के मूल्यांकन के लिए एक मुड़ा हुआ पेपर-किट विकसित किया है, जो अब एक बढ़ती हुई चुनौती है। यह किट उस पर चिह्नित परीक्षण-स्थलों पर केवल रंग परिवर्तन को ही ट्रैक करके किसी भी औषधि के लिए बैक्टीरिया की संवेदनशीलता का आकलन करने में सहायता करती है। इस तरह, 3-4 घंटे के भीतर, उस बैक्टीरिया को मारने के लिए विशिष्ट दवाओं की प्रभावकारिता के लिए उनके उपयोग की ऐसी सिफारिश की जा सकती है जिससे सही समय पर नैदानिक ​​निर्णय लेने से जीवन रक्षा करने की सुविधा मिलती है।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image006N3TT.png

 

उन्होंने एक अभिकर्मक-मुक्त ( रीएजेंट- फ्री ) रक्ताल्पता ( एनीमिया ) का पता लगाने वाली तकनीक इस तथ्य पर विकसित की है कि गीले ( नम ) कागज की पट्टी पर फैलते समय रक्त अद्वितीय पैटर्न बनाता है। इस पैटर्न में लाल रक्त कोशिका सामग्री के चित्रण इस तरह से होते हैं कि उन्हें खून की कमी वाले ( एनीमिक ) और सामान्य रोगियों के लिए वर्गीकृत किया जा सकता है और निर्देश अनुसार ( कस्टम-मेड ) बनाए गए इमेज-एनालिटिक्स ऐप के माध्यम से विश्लेषण किए जाने पर इसे अलग-अलग समझा जा सकता है। यह तत्काल रक्त आधान ( ब्लड ट्रांसफ्यूजन ) या अन्य जीवन रक्षक उपायों की आवश्यकता के जोखिम वाले रोगियों को जल्दी से वर्गीकृत कर सकता है।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image007SVNR.png

 

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ( डीएसटी ) के एक संबद्ध संस्थान विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड ( साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड – एसईआरबी ) से जे. सी. बोस राष्ट्रीय अध्येता ( नेशनल फेलो ) प्रोफेसर चक्रवर्ती के साथ-साथ उनके समूह ने बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं को रोगी, ‘रिमोट’ डॉक्टर और आविष्कार की गई मितव्ययी निदान-प्रौद्योगिकियों के लिए एक इंटरफेस के रूप में काम करने के लिए प्रशिक्षित किया। यह सभी इस प्रक्रिया में स्थायी आजीविका के सृजन को सक्षम करती हैं। इसके अलावा, सबसे तकनीकी रूप से उन्नत लेकिन भ्रामक रूप से सरल चिकित्सा उत्पादों के निर्माण में भाग लेने की दिशा में सूक्ष्म-लघु और मध्यम उद्यमों के सशक्तिकरण ने कठिन परिस्थितियों में रोजगार सृजन का एक नया प्रतिमान खोल दिया है ।

प्रयोगशाला से क्षेत्र ( फील्ड ) तक – एक स्थायी पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करना

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image008SKVY.png

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image009VACL.png

 

प्रो. सुमन चक्रवर्ती ( suman@mech.iitkgp.ac.in ), व्हाट्सएप: +91-9831402939

जे. सी. बोस राष्ट्रीय अध्येता (नेशनल फेलो) विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड – एसईआरबी), विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार pib

 

खबरें और भी है

Please select a default template!