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Inspirational Story - Importance of Justice

प्रेरणादायक कहानी – न्याय का महत्व

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राजा का मूर्तियों से प्रेम 
 
स्पेशल स्टोरी : एक राजा था जिसे शिल्पी कला अत्यंत प्रिय थी | उसे मूर्तियों का शोक था | जिसकी खोज में वह देश-विदेश जाया करता था | इस प्रकार वे कई मूर्तियाँ अपने राज महल में लाकर रखते और स्वयं उनकी देखरेख करवाते सभी मूर्तियों में उन्हें तीन मूर्तियां जान से भी ज्यादा प्यारी थी | सभी को पता था कि राजा को इन मूर्तियों से अत्यंत लगाव हैं |

सेवक से टूटी मूर्तियाँ 
 
एक दिन एक सेवक इन मूर्तियों की सफाई कर रहा था | तभी गलती से उसके हाथों एक मूर्ति टूट गई | जब राजा को यह बात पता चली तो उन्हें बहुत क्रोध आया और उन्होंने उस सेवक को मृत्युदान दे दिया | सजा के सुनने के बाद सेवक ने अन्य दो मूर्तियों को भी तोड़ दिया | यह देख कर सभी को आश्चर्य हुआ | राजा ने उस सेवक से इसका कारण पूछा तब उस सेवक ने कहा महाराज ! क्षमा करना | 
 
 
अमरता का वरदान तो कोई लेकर आया नहीं 
 
यह मूर्तियां मिट्टी की बनी है, अत्यंत नाजुक हैं | अमरता का वरदान लेकर तो आई नहीं हैं | आज नहीं तो कल टूट ही जाती | अगर मेरे जैसे किसी प्राणी से टूट जाती तो उसे अकारण ही मृत्युदंड का भागी बनना पड़ता | मुझे तो मृत्यु दंड मिल ही चूका हैं इसलिए मैंने ही अन्य दो मूर्तियों को तोड़’कर उन दो व्यक्तियों की जान बचा ली | यह सुनकर राजा की आँखे खुल गई उसे अपनी गलती का भान हुआ और उसने सेवक को सजा से मुक्त कर दिया |

सेवक ने सिखाया साँसों का मूल्य 

इस तरह सेवक ने सिखाया साँसों का मूल्य | न्यायाधीश के आसन पर बैठकर अपने निजी प्रेम के चलते छोटे से अपराध के लिए मृत्युदंड देना उस आसन का अपमान समझा | एक उच्च आसन पर बैठकर हमेशा उसका आदर करना चाहिये | राजा हो या कोई भी अगर उसे न्याय करने के लिए चुना गया है तो उसे न्याय के महत्व को समझना चाहिये |

मूर्तियों से राजा का प्रेम किसी की साँसों से बड़ा है क्या ?
 
मूर्ति से राजा को प्रेम था लेकिन उसके लिए सेवक को मृत्युदंड देना न्याय के विरुद्ध था | न्याय की कुर्सी पर बैठकर किसी को भी अपनी भावनाओं से दूर हट कर फैसला देना चाहिये | राजा से कई गुना अच्छा तो वो सेवक था जिसने मृत्यु के इतना समीप होते हुए भी परमहित का सोचा |

कहानी से मिली सीख : यह कहानी हमें अपने जीवन में भी बदलाव करने के प्रति प्रेरित करती हैं | कभी-कभी हमारी प्रिय वस्तु के टूट जाने अथवा खो जाने पर हम अपनों पर ही गुस्सा करते हैं | हम एक वस्तु और रिश्ते के फर्क को भूल जाते हैं और अनादर करने लगते हैं जो कि गलत है |  यह कहानी हमें शिक्षा देती हैं कि आवेश में आकर कभी कोई निर्णय नहीं लेना चाहिये | 

 
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