You Must Grow
India Must Grow

Follow Us On

National Thoughts

A Web Portal Of Positive Journalism

National Thoughts – We Must Grow India Must Grow 

Motivational Story : Death Story

Motivational Story : मौत की कहानी

Share This Post

न्यूज डेस्क ( नेशनल थॉट्स ) : आज हम आपको उस टॉपिक के बारे में बताने जा रहे है जिसके बारे में कोई बात भी नहीं करना चाहता | मौत जिसके नाम से ही डर लगता है सबको। पर चाहे हम जितना डरे, जितना इससे भूलने की कोशिश करें लेकिन मृत्यु जीवन का परम सत्य है।
 
शिष्य ने अपने गुरु से पूछा सवाल ? 

एक गुरूजी से उनके एक शिष्य ने पूछा, “गुरूजी आपसे कभी कोई गलती क्यों नहीं होती? आप हमेशा खुश रहते हैं। अगर कोई आपके साथ गलत भी करता है तो भी आप उसे कुछ नहीं कहते। मैंने आपको कभी दुखी और उदास देखा ही नहीं। आप कभी किसी का दिल नहीं दुखाते, किसी के साथ कुछ गलत नहीं करते। लेकिन यह संभव कैसे है?”

तुम्हारे पास सिर्फ 1 दिन बचा है – गुरु ने शिष्य से कहा 

इसके जवाब में गुरूजी ने उससे कहा, “तुम यह सारी बातें छोड़ो और मैं तुम्हे एक दुखद सुचना बताने जा रहा हूँ तुम उस पर ध्यान दो।’ शिष्य ने पूछा, “कौनसी सुचना?” गुरूजी बोले, “अब तुम्हारे पास सिर्फ 24 घंटे बचे हैं। 24 घंटे बाद अब तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी। तुम मर जाओगे।” गुरूजी के मुँह से यह बात सुनकर उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। वह थर-थर काँपने लगा और रोने लगा जब उसे पता चला की उसके पास सिर्फ 1 दिन बचा है। तो उसने जिस-जिस का भी दिल दुखाया था सबसे माफ़ी माँग ली | अपने घरवालों को प्यार देने लगा। लोगों में चीज़े बाँटने लगा क्यूंकि अब उसके पास बहुत कम समय बचा था और जिस किसी के साथ भी उसका गुस्सा था, शिकायत था वह सारी दूर हो गई।

क्या बीते दिन तुमने कोई गलत काम किया ? 

अगले दिन खुद गुरूजी उसके घर पहुँच गए और उससे पूछा, “बताओ कि कल से लेकर अभी तक तुमने कोई गलत काम किया? किसी से झगड़ा किया? मन में किसी से कोई शिकायत रही? कोई पाप किया? किसी का दिल दुखाया?” वह बोला, “गुरूजी, मौत मेरे सर पर खड़ी है मैं किसी के साथ क्या गलत व्यवहार करूँगा बल्कि मैंने सबसे माफ़ी माँग ली और सबको माफ़ कर दिया। अब मैं मरने ही वाला हूँ तो ज़िंदगी से मुझे और क्या शिकायत हो सकती है।”

जितना भी समय बचा है उसमें मैं लोगों को खुश रख सकूँ बस यहीं मेरी इच्छा है !

गुरूजी ने उससे कहा, “यही तेरे सवाल का जवाब है। तुमने कल मुझसे पूछा था कि मुझे किसी से कोई शिकायत क्यों नहीं होती? मैं उदास क्यों नहीं होता? मैं दुखी क्यों नहीं होता? इन सारी बातों का यही जवाब है कि मैं अपनी मौत को कभी नहीं भूलता। मुझे यह हमेशा याद रहता है कि मेरे पास सिर्फ उतना ही टाइम है, मैं यहाँ कुछ समय के लिए आया हूँ और एक दिन मृत्यु कर मुझसे मेरा जीवन छीन लेगी। तो जो भी समय मेरे पास बचा है वह मैं रोने में, दुखी होने में, शिकायत करने में, लोगों के साथ गलत व्यवहार करने में क्यों खत्म करूँ। ज़िंदगी में जो भी वक्त मेरे पास बचा है उसे मैं खुश होकर गुजारु। मैं अपने वक्त से खुदको और लोगों को ज़्यादा से ज़्यादा खुशियाँ दे सकू। काश हमें भी इस बात का अहसास हो जाए कि जो हमें ज़िंदगी मिली है वह हमें हमेशा के लिए नहीं मिली है। जैसे हर चीज़ की एक एक्सपायरी डेट होती है वैसे हमारे शरीर की भी एक एक्सपायरी डेट है। एक न एक दिन मृत्यु आती ही है।”

गुरुजी ने सुनाई कहानी, मौत से दोस्ती कर लो  

गुरूजी ने फिर उसे एक कहानी सुनाई और बोले, एक व्यक्ति की मौत से दोस्ती हो गई तो उसने मौत से कहा कि अब तो तुम मेरी दोस्त हो गई हो तो अब तुम मुझे नहीं मारना। तो मौत ने कहा कि यह मेरे हाथ में नहीं है। यह प्रकृति का नियम है। जो भी इस दुनिआ में आया है उसे मरना ही पड़ेगा। तो उसने कहा ठीक है अगर तुम मुझे मारोगे ही तो इतना तो कम से कम करना कि जब मेरी मौत का समय निश्चित हो जाए तो उससे पहले मुझे बता देना कि मेरी मौत आने वाली है ताकि ज़िंदगी में जो कुछ भी मैं करना चाहता हूँ वह मैं कर सकू। 

 
मौत ने भेजी चिट्ठियाँ 
 
अपनी हर इच्छा पूरी कर सकू।फिर मौत ने उससे कहा कि तेरी मौत आने से पहले मैं तुझे चिट्ठियाँ भेजा करुँगी।” यह सुनकर वह व्यक्ति खुश हो गया और सोचने लगा कि कम से कम मुझे पता तो चलेगा कि मेरी मौत कब होने वाली है? उसकी ज़िंदगी में समय-समय पर कभी उसके मामा, चाचा, माता, पिता, दोस्त धीरे-धीरे करके सब मरने लगे और एक दिन ऐसा हुआ कि मौत उसके सामने आकर खड़ी हो गई और कहने लगा कि अब तू भी चल तेरा भी वक्त आ गया है। वह बहुत हैरान सा रह गया और कहा कि तुमने तो कहा था कि मैं तुम्हे चिट्ठियाँ भेजूँगी पर मेरे पास कोई चिट्ठियाँ नहीं आई और तुम अचानक से मुझे लेने आ गई हो। इसके बाद मौत ने कहा कि मैंने तुम्हे बहुत चिट्ठियाँ भेजी जब शुरू-शुरू में तुम्हारे रिश्तेदार मरे। वह सारी मेरी चिट्ठियाँ थी कि अब तेरा नंबर जल्दी ही आने वाला है। फिर तुम्हारे दोस्त मरे वह भी मेरी चिट्ठियाँ ही थी।

क्या हम ज़िंदगी जी रहे है या बर्बाद कर रहे है ? 

वास्तविकता में यह कहानी हमारी ही है। हमें भी मौत चिट्ठियाँ भेजती रहती है कि आज यह मर गया आज वह मर गया। लेकिन हमें होश ही नहीं होता, हमें यह अहसास ही नहीं होता कि एक दिन हमारा भी समय खत्म होगा। हज़ारों लोग रोज मरते हैं लेकिन उन्हें देखकर भी दूसरे लोगों को होश नहीं आता। दूसरे लोग बेहोश होकर पड़े हैं। बात यह नहीं है कि मौत एक दिन आनी ही है, बात यह है कि क्या हम ज़िंदगी जी रहे हैं? या हम अपनी ज़िंदगी ऐसे ही बर्बाद कर रहे हैं?

समय का एहसास होना बहुत जरूरी 

कहते है कि हम जब इस दुनिया में आते है न तो रोते-रोते आते हैं। हम तो रोते है लेकिन यह दुनिया हमें देखकर बहुत खुश होती है बहुत हँसती है। लेकिन हम अपनी ज़िंदगी में कुछ ऐसा कर जाए कि जिस दिन हम दुनिया से जाए हम तो हँसते-हँसते जाए और यह दुनिया हमको रो-रो कर याद करती रहे। अगर हमें भी यह अहसास बना रहे यह याद बनी रहे कि हमारे पास सीमित समय है तो किसी से कोई नाराज़गी नहीं रहेगी, किसी से कोई गुस्सा नहीं होगा, किसी से कोई झगड़ा भी नहीं होगा। सारी मुसीबत दूर हो जाएगी। हर दुख आपको छोटा लगने लगेगा।

कहानी से मिली सीख 

सभी लोगों में खुशियां बांटे, दुख और उदास रहकर किसी का फायदा नहीं होता !

अगर आपको यह अहसास हो जाए कि आपकी ज़िंदगी हर दिन आपके हाथ से निकल रही है, आपका वक्त आपके हाथ से निकल रहा है यह सब सोचकर आपको डरने की बिलकुल भी जरुरत नहीं है। ज़िंदगी को जीना सीखिए। अपने लाइफ में खुश रहना सीखिए। आप इसे असेही दुख और उदासी में ख़त्म मत करे बल्कि इस समय का सही उपयोग करके आप खुद भी खुश रहो और सारी दुनिया में खुशियाँ बाँटो।

 
 
ऐसी ही प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने के लिए www.nationalthoughts.com पर क्लिक करें | इसके साथ ही देश और दुनिया से जुड़ी अहम जानकारियों को जानने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल NATIONAL THOUGHTS को SUBSCRIBE करें और हमेशा अपडेटेड रहने के लिए हमें FACEBOOK पर FOLLOW करें | 

Leave a Reply

Your email address will not be published.

खबरें और भी है ...

Advertisment

होम
खोजें
विडीओ

Follow Us On