शर्मा जी सुबह सुबह अपने दफ़्तर के लिए निकलने वाले थे। तभी अचानक क्षितिज ने एक पैकेट उनके सामने कर दिया पापा ! वापस करना है ये जैकेट। क्यों? फिट नहीं हो रहा ज़्यादा टाइट है । लंच बॉक्स देते हुए मां तमतमाई अरे शर्मा जी ! आप भी न बेटा बड़ा हो गया है औऱ पहले से ज़्यादा तगड़ा भी , अब थोड़ा बड़ा साइज का जैकेट ही पहनेगा ना क़भी कुछ ख़याल तो रहता नहीं आपको !
फिर से आप उसके लिए पुराना साइज ले आएँ होंगे । इतना महंगा वाला जैकेट लाने से पहले एक बार उससे पूछ भी लिया होता। लेकिन अपनी पत्नी की बातों को बेहद गौर से सुनने के बाद भी शर्मा जी की आंखों में अपने लाड़ले के लिए अविश्वास दिखा क्षितिज ने बात ही ऐसी की थी क्योंकि शर्मा जी ये भली भांति जानते थे कि उनका औऱ उनके बेटे का साइज़ एक ही है ।
बेटा ! इस बार भी इंटरव्यू में वही पुराना जैकेट बोलते-बोलते रुक गए शर्मा जी शायद उनका गला भर आया था । छोड़िए न पापा ! इंटरव्यू ही तो देना है , कोई फ़ैशन शो में थोड़े न जाना है मुझें । आख़िर क्या फर्क पड़ता है ! जीवन की राह नई है और मंजिल नई , जैकेट पुराना ही सही। दरअसल क्षितिज की नज़र अपने पिता की बहुत पुरानी स्वेटर पर थी जो उसके पुराने जैकेट से भी कहीं ज़्यादा फटेहाल थी।
पत्नी की ज़िद पर बेचारगी में शर्मा जी ने जब उस जैकेट को नापना शुरू किया तो उन्हें बिलकुल फिट आ गया
हालांकि उन्होंने जैकेट अपने साइज़ का ही लिया था क्योंकि दोनों बाप बेटे का नाप एक था । मजबूरी में कोई चारा न देख शर्मा जी नया जैकेट पहनकर अपने मन में कुछ कुछ सोंचते हुए दफ़्तर के लिए निकल गए । उनके जाने के बाद माँ ने क्षितिज को आवाज़ देकर अपने पास बुलाया औऱ फ़िर उसके माथे को चूमते हुए अपनी डबडबाई आँखों को छुपाकर उससे कहा देखते देखते अब काफ़ी बड़ा हो गया है तू मुन्ना
क्षितिज भी अपने आंसू रोक न पाया औऱ अपनी माँ से लिपटकर बुदबुदाया मेरी हर जरूरत का ख़याल रखने वाले मेरे पापा कभी गलत साइज़ ला ही नहीं सकते , लेकिन अगर वो जैकेट मैं पहनता तो मुझे चुभता बहुत चुभता।