तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के एक फैसले ने नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया है। विजय सरकार ने राज्य की मुख्यमंत्री ब्रेकफास्ट स्कीम का नाम बदलकर ‘पेरुंथलैवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम’ करने का आदेश जारी किया है। यह फैसला केवल योजना के नाम में बदलाव नहीं, बल्कि इसके राजनीतिक संदेश को लेकर भी चर्चा में है।
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता के. कामराज को शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में उनकी विरासत को अपनी सरकार की योजना से जोड़ना विजय की राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
DMK की योजना को कामराज से जोड़ा
‘मुख्यमंत्री ब्रेकफास्ट स्कीम’ को तत्कालीन DMK सरकार और एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में सितंबर 2022 में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के लिए शुरू किया गया था।
विजय की तमिलगा वेट्री कषगम (TVK) सरकार के सत्ता में आने के बाद 15 जुलाई को कामराज जयंती के अवसर पर इस योजना का विस्तार कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए किया गया। इसके बाद योजना के नाम में कामराज को शामिल करने का फैसला लिया गया।
शिक्षा और मिड-डे मील से कामराज का जुड़ाव
कामराज की राजनीतिक विरासत में शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 1956 में उन्होंने तत्कालीन मद्रास राज्य में स्कूल मील कार्यक्रम के विस्तार की पहल की थी। इसके तहत गरीब प्राथमिक स्कूल के बच्चों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी।
यही वजह है कि कामराज का नाम स्कूलों से जुड़ी किसी कल्याणकारी योजना के साथ जोड़ना उनके समर्थकों के लिए विशेष महत्व रखता है।
नाडर समुदाय पर भी नजर?
विजय के इस कदम को दक्षिणी तमिलनाडु के नाडर समुदाय के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली, थूथुकुडी, तेनकासी और विरुधुनगर जैसे दक्षिणी जिलों में नाडर समुदाय का चुनावी प्रभाव महत्वपूर्ण है।
हालांकि अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में समुदाय का प्रभाव अलग-अलग है। राजनीतिक विश्लेषणों में इसे TVK के लिए दक्षिणी तमिलनाडु में अपना आधार मजबूत करने की संभावित कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
विजय की राजनीति में कामराज का महत्व
विजय की पार्टी TVK की राजनीतिक पहचान पारंपरिक DMK-AIADMK ढांचे से अलग बनाने की कोशिश के रूप में देखी जाती है। ऐसे में कामराज जैसे नेता की विरासत को आगे रखना उनके लिए एक अलग राजनीतिक संदर्भ तैयार कर सकता है।
कामराज को शिक्षा, ग्रामीण विकास, स्वच्छ शासन और कल्याणकारी राजनीति से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए उनके नाम का इस्तेमाल विजय को द्रविड़ राजनीति से अलग एक वैकल्पिक राजनीतिक विरासत से जोड़ने में मदद कर सकता है।
BJP समर्थकों ने भी देखा अवसर
विजय के इस फैसले पर कुछ BJP समर्थकों की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। ‘टीम RD मोदीजी फॉर 2029’ से जुड़े रवींद्रन दुरईसामी ने कामराज को व्यापक OBC राजनीतिक प्रतीक के रूप में पेश करने की बात कही है।
उनके संगठन की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्र सरकार की किसी योजना का नाम के. कामराज के नाम पर रखने का सुझाव दिए जाने की बात भी सामने आई है। इसमें नाडर, एझावा, भंडारी, जायसवाल, अहलूवालिया, गौड़ और इडिगा जैसे विभिन्न समुदायों को कामराज की विरासत से जोड़ने का विचार रखा गया है।
2029 से पहले बढ़ेगी राजनीतिक हलचल?
दक्षिणी राज्यों में अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिशों के बीच कामराज की विरासत का इस्तेमाल एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक संदेश के तौर पर किया जा सकता है।
विजय के लिए कामराज का नाम DMK के स्थापित राजनीतिक प्रभाव से अलग पहचान बनाने का माध्यम बन सकता है, जबकि BJP समर्थक इसे OBC समुदायों तक पहुंच बढ़ाने की संभावित रणनीति के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, इन राजनीतिक दावों का वास्तविक चुनावी असर आने वाले चुनावों में ही स्पष्ट होगा।







