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भगवान विष्णु के सहस्रबाहु मंदिर का नाम कैसे पड़ा ‘सास-बहू’? जानें सच

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admin
19 अगस्त 2026 को 05:10 am बजे
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भारत में हिंदू देवी-देवताओं को समर्पित कई प्राचीन और भव्य मंदिर हैं। इनमें से कुछ मंदिर अपने धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं, तो कुछ अपने अनोखे नाम और इतिहास के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं। ऐसा ही एक मंदिर राजस्थान के उदयपुर के पास स्थित सास-बहू मंदिर है।

नाम सुनकर भले ही ऐसा लगे कि यहां सास और बहू की पूजा होती होगी, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। इस मंदिर का वास्तविक नाम सहस्त्रबाहु मंदिर है और यह भगवान विष्णु को समर्पित है। समय के साथ इसका नाम बदलकर प्रचलन में ‘सास-बहू मंदिर’ हो गया।

उदयपुर के पास स्थित है प्राचीन मंदिर

सहस्त्रबाहु मंदिर राजस्थान के नागदा गांव में स्थित है, जो उदयपुर से करीब 22 किलोमीटर दूर बताया जाता है। मंदिर की स्थापत्य शैली करीब 10वीं शताब्दी के आसपास की मानी जाती है।

मंदिर की नक्काशी और वास्तुकला इसे राजस्थान के प्रमुख ऐतिहासिक मंदिरों में शामिल करती है। आज यह धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व के कारण भी पर्यटकों को आकर्षित करता है।

क्यों पड़ा ‘सास-बहू मंदिर’ नाम?

प्रचलित मान्यता के अनुसार, मंदिर परिसर में दो प्रमुख मंदिर हैं। इनमें एक बड़ा मंदिर और दूसरा अपेक्षाकृत छोटा मंदिर है। इसी वजह से बड़े मंदिर को ‘सास’ और छोटे मंदिर को ‘बहू’ कहकर पुकारा जाने लगा।

हालांकि, यह नाम मूल रूप से मंदिर का आधिकारिक धार्मिक नाम नहीं था। इसका वास्तविक नाम सहस्त्रबाहु मंदिर बताया जाता है।

भगवान विष्णु को समर्पित है मंदिर

सहस्त्रबाहु शब्द का अर्थ ‘हजार भुजाओं वाला’ होता है। मंदिर को भगवान विष्णु के एक स्वरूप से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि यहां भगवान श्रीहरि की आराधना के लिए मंदिर का निर्माण कराया गया था।

समय के साथ स्थानीय लोगों के बीच दो मंदिरों को सास और बहू के रूप में संबोधित करने की परंपरा लोकप्रिय हो गई और यही नाम धीरे-धीरे प्रसिद्ध हो गया।

किसने बनवाया था मंदिर?

मंदिर के निर्माण को लेकर इतिहास में अलग-अलग मत मिलते हैं। प्रचलित जानकारी के अनुसार, इसका निर्माण कच्छवाह वंश के राजा महिपाल के समय 10वीं या 11वीं शताब्दी के आसपास कराया गया था।

कहा जाता है कि राजा की पत्नी भगवान विष्णु की भक्त थीं। उनके लिए भगवान श्रीहरि को समर्पित मंदिर का निर्माण कराया गया। बाद में परिवार की दूसरी धार्मिक मान्यताओं से जुड़े मंदिर भी परिसर में बनाए गए।

आज भी आकर्षण का केंद्र है सास-बहू मंदिर

नागदा का यह मंदिर अपनी प्राचीन वास्तुकला, खूबसूरत नक्काशी और ऐतिहासिक महत्व के कारण आज भी लोगों के आकर्षण का केंद्र है। ‘सास-बहू मंदिर’ नाम भले ही आधुनिक बोलचाल में लोकप्रिय हो गया हो, लेकिन इसकी पहचान भगवान विष्णु को समर्पित प्राचीन सहस्त्रबाहु मंदिर के रूप में है।