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Real Hero: India is the world's biggest donor - Palam Kalyanasundaram, read the full story

Real Hero : भारत में है, दुनिया का सबसे बड़ा दानवीर – पालम कल्याणसुन्दरम, पढ़ें पूरी कहानी

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स्पेशल स्टोरी ( नेशनल थॉट्स ) : हमारे आज के रियल हीरो की कहानी बेहद खास है | ऐसा इसलिए क्योंकि इन्होंने अपनी पूरी उम्र भर की कमाई लोगों की मदद करने में लूटा दी | सोचिए, महीने की पहली तारीख है; आज आपको अपनी  सैलरी मिल गयी है जिसका आप इतनी बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे…लेकिन तभी आपको पता चलता है कि कोई  गरीब-लाचार आदमी बहुत कष्ट में है और उसे पैसों की सख्त ज़रूरत है तो आप अपनी सैलरी का कितना हिस्सा उसे दे देंगे?

1%..2%…या शायद 5%

खैर ये तो हो गयी सिर्फ 1 महीने की सैलरी में से कुछ हिस्सा देने की बात…लेकिन अगर आपसे कहा जाए की आप जितने साल तक काम करें, उतने साल तक हर महीने अपनी सैलरी से एक हिस्सा किसी ज़रूरतमंद के लिए दे दीजिये तो आप कितना बड़ा हिस्सा दे पायेंगे ? 
लेकिन तिरुनेलवेली के रहने वाले पालम कल्याणसुन्दरम तो ना जाने किस मिट्टी के बने हैं, उन्होंने लगातार तीस साल तक, हर महीने मिलने वाली अपनी पूरी सैलरी दान में दे दी | जी हाँ, पूरी की पूरी सैलरी!  

आइये आज हम उस महान शख्स की कहानी जानते हैं-

  • दुनिया का पहला और अकेला इंसान है जिसने अपनी सारी कमाई दान में दे दी
  • जिसे सुपरस्टार रजनीकांत अपने पिता के रूप में अडॉप्ट कर चुके हैं
  • जिसे यूनाइटेड नेशंस ने 20th century के outstanding लोगों में शुमार किया है
  • जिसे अमेरिका की एक संस्था, “Man of the Milennuim” award दे चुकी है
  • जिससे अमेरिका के भूतपूर्व राष्ट्रपति Mr. Bill Clinton, अपनी भारत यात्रा के दौरान मिलना चाहते थे
  • जिसे भारत सरकार ने “Best Librarian of India” माना है, और
  • जिसे `The International Biographical Centre, Cambridge ने ‘one of the noblest of the world’ का सम्मान दिया है |


शुरुआती जीवन 

 
पालम कल्याणसुन्दरम का जन्म 1953 में तमिलनाडु के तिरूनेवेली जिले के मेलाकरुवेलान्गुलम गाँव में हुआ था। जब वे सिर्फ एक साल के थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया। उनकी माँ ने उन्हें पाल-पोस कर बड़ा किया और उनके अन्दर अच्छे संस्कारों के बीज डाले। कल्याणसुन्दरम जी के अनुसार, उनकी माँ ने उन्हें खुश रहने के तीन मंत्र सिखाये थे |

  • पहला, कभी लालच मत करो | 
  • दूसरा, अपनी कमाई का दसवां हिस्सा किसी नेक काम में खर्च करो |
  • तीसरा, रोज कम से कम कोई एक दयालुता का काम करो

और कल्याणसुन्दरम जी ने तो माँ की सीख से कहीं आगे बढ़ कर काम किया है और साथ ही लाखों लोगों को इन्सपाइर किया है!

 
आत्महत्या करने का विचार
 
अगर आप उनका कोई विडियो देखें तो आपको उनकी आवाज़ कुछ अलग सी लगेगी, दरअसल शुरू से ही उनकी आवाज़ बहुत पतली थी जिसकी वजह से उनमे आत्मविश्वास की कमी थी और एक समय वो इस बात से इतने परेशान थे की अपनी ज़िंदगी ही ख़त्म कर लेना चाहते थे। लेकिन तभी उनकी मुलाक़ात एक मोटिवेशनल स्पीकर से हुई जिसने कुछ ऐसा कहा की उनकी ये हीन भावना हमेशा के लिए ख़त्म हो गयी…उसने कहा- इसकी चिंता मत करो कि तुम कैसे बोलते हो बल्कि कुछ ऐसा करो कि दूसरे तुम्हारे बारे में अच्छा बोलें।

नौकरी और सोशल वर्क

पढाई के बाद उनकी नौकरी Kumarakuruparan Arts College at Srivaikuntam, में बतौर लाइब्रेरियन लग गयी, जहाँ उन्होंने 35 साल तक काम किया। शुरू के कुछ सालों में वो अपनी कमाई का एक छोटा हिस्सा ही दान में देते थे लेकिन जल्द ही वे अपनी पूरी कमाई ही दान में देने लगे और अपना खर्चा चलाने के लिए छोटे-मोटे काम करने लगे।

पालम कल्याणसुन्दरम कहते हैं, “ये समझने के लिए की गरीब होना कैसा होता है मैं फुटपाथों  पर और रेलवे प्लेटफार्म पर सोया हूँ, सर पर बिना किसी छत के।”
कई बार कल्याणसुन्दरम जी को ऐसा करते उनके स्टूडेंट्स देख लेते और बाद में उनसे आ कर कहते की हमने आज प्लेटफार्म पर आपके एक डुप्लीकेट को देखा…बिलकुल आपकी तरह! और कल्याणसुन्दरम जी ये सुनकर मुस्कुरा देते।

अंत में सब यही छोड़कर जाना है 

उनका कहना है,  “मैं एक बैचलर हूँ और मेरी पर्सनल ज़रूरतें बहुत कम हैं। मैं होटल और लांड्री वगैरह में छोटे-मोटे काम करके अपना खर्चा चला लेता हूँ। मैं…बस किसी चीज पर अपना अधिकार नहीं चाहता। मेरे जीवन का सबसे सुखद पलों में से एक वो पल था जब मुझे एक अमेरिकी आर्गेनाइजेशन ने “Man of the Millennium” चुना और मैंने इनाम में मिले 30 करोड़ रुपये चैरिटी में दे दिए। अंत में जब हम दुनिया छोड़ कर जाते हैं तो अपने साथ क्या ले जाते हैं?”

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