You Must Grow
India Must Grow

Follow Us On

National Thoughts

A Web Portal Of Positive Journalism

National Thoughts – We Must Grow India Must Grow 

Today's Story: Need You

आज की कहानी : आप की जरूरत

Share This Post

सन्यासी बनना चाहता है शख्स 
 
एक व्यक्ति था। उसके गुरु एक सन्यासी थे। वह व्यक्ति दुनिया दारी से ऊब सा गया था। वह अपने गुरु की तरह ही दुनियादारी छोड़कर सन्यासी  बनना चाहता था। उसने अपने परिवार को यह बात बताई तो सभी ने मना कर दिया। यह कहते हुए की हम सब आपसे बहुत प्यार करते है। फिर उसने अपने गुरु को यह बात बताई परंतु साथ ही कहा कि उनका घर-परिवार बच्चे और पत्नी उसे संन्यास लेने नहीं दे रहे हैं  क्योंकि वह मुझसे बेहद प्यार करते हैं।

गुरु ने समझाया, योजना बनाई   
 
गुरु ने कहा “यह किसी सूरत में प्यार नहीं है”। गुरु ने उसे बहुत समझाया पर वह व्यक्ति नहीं मान रहा था। फिर गुरु ने कहा, “अच्छा ठीक है”। गुरु जी उस व्यक्ति को मठ में ले गए। इसके बाद गुरु ने उसे योग विद्या सिखाई जिससे वह अपनी सांसे रोक कर मुरदे जैसी अवस्था में घंटो तक रह सकता था। यह सब सिखाने के बाद गुरु ने उसे एक योजना बताई और उसे घर भेज दिया।

अगले ही दिन मुर्दा मिला शख्स 
 
दूसरे दिन वह व्यक्ति अपने घर पर मुर्दा पाया गया। परिवार के सारे लोग इकट्ठे हो गए। सभी रो रहे थे। विलाप कर रहे थे। वही उसकी पत्नी सबसे ज्यादा दुखी हो रही थी। पूरे घर में कोहराम मच गया था। सभी की आंखे नम थी। वह व्यक्ति मुर्दा अवस्था में था, मगर योग अभ्यास से आसपास के माहौल को महसूस कर सकता था और सुन सकता था।

संन्यास का इरादा त्यागने का फैसला किया 

उसे बड़ा सुकून मिला कि उसका परिवार उसे कितना प्यार करते हैं, अंतत: उसने संन्यास का इरादा त्यागने का फैसला कर लिया। कुछ ही देर बाद उस व्यक्ति के गुरु वहाँ पहुंचे। गुरु ने सभी को शांत किया। और अपने शिष्य के पड़े शव को देखा। कुछ देर शव को देखने के बाद उसके परिवार वालो को कहा इस शव में जान फुका जा सकता है। इस व्यक्ति को मैं अपनी विद्या से जिंदा कर सकता हूँ।


घर के सभी लोग हुए खुश, जानिए इसके पीछे की वजह  
 
यह बात सुनकर घर के सभी लोग बहुत खुश हो गए। सभी को एक उम्मीद की किरण नजर आ रही थी। फिर सभी ने उस सन्यासी से कहा “तो आप यह काम जल्द से जल्द करिये”। इस पर उस संन्यासी ने कहा “एक समस्या है, इस कार्य लिए परिवार के किसी अन्य सदस्य को अपनी प्राण त्यागना होगा। यह सुन कर सभी लोगों की सांसे रुकी की रुकी रह गई। सभी ने एक दूसरे को देखा। सन्यासी ने परिवार के सभी सदस्यों से एक एक कर पूछा पर किसी ने भी हां नहीं कहा।


जान की जरूरत बताई और अपनी जिम्मेदारी

सभी ने अपनी जान की जरूरत बताई और अपनी जिम्मेदारी भी। सन्यासी ने फिर उस व्यक्ति के पत्नी से कहा, अगर यह नहीं रहे तो तुम कैसे जियोगी। उसकी पत्नी ने तुरंत जवाब दिया मैं इनके बगैर भी जी लुंगी। गुरु ने उस व्यक्ति के बच्चों से भी यही सवाल किया। उसका भी जवाब न ही थी। फिर यही सवाल उस व्यक्ति के माता-पिता से किया। उनका भी जवाब एक ही था। इसके बाद गुरु उस व्यक्ति के शव के पास आए और बोले हे व्यक्ति तुम उठ खड़े हो जॉव। वह व्यक्ति उठ कर बैठ गया।

गुरु को रोका और बताई अपनी जरूरत   
 
फिर उसके गुरु वहाँ से जाने लगे। उसने अपने गुरु को रोका और गुरु से कहा, “मैं भी आपके साथ चलता हूँ”। अब उस व्यक्ति को समझ में आ गया था कि उसकी जरूरत उसके घर में कितना है। अब वह एक पल भी अपने घर में रहना नहीं चाहता था।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

खबरें और भी है ...

Advertisment

होम
खोजें
विडीओ

Follow Us On