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Triphala: Method of preparation and right way to consume

त्रिफला : बनाने की विधि और सेवन करने का सही तरीका

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न्यूज डेस्क ( नेशनल थॉट्स ) :  त्रिफला मानवीय शरीर के लिए बेहद ही फायदेमंद औषधि है | इसके सेवन से शरीर का ओज बना रहता है। नेत्र विकार के लिए उत्तम रसायन इसमें पाए जाते है। शास्त्रीय योगों में सप्तामृत लौह, त्रिफला घृत आंखों के लिए सेवनीय है। त्रिफला का जूस भी मार्केट में उपलब्ध है। आप चाहें तो काढ़ा बनाकर भी इसका सेवन कर सकते हैं। ये एक प्रकार का अच्छा पाचक माना जाता है |
बनाने की विधि 
एक भाग हरड़, दो भाग बहेड़ा और तीन भाग आंवला लेकर अच्छे से कूट-पीसकर कपड़े में छान लें। आपका चूर्ण तैयार है । यानि
  1. 100 ग्राम हरड़
  2. 200 ग्राम बहेड़ा
  3. आँवला 300 ग्राम
सेवन करने की सही विधि  
 
सुबह हाथ मुंह धोने व कुल्ला आदि करने के बाद खाली पेट ताजे पानी के साथ  2 से पांच ग्राम तक इसका सेवन करें तथा सेवन के बाद एक घंटे तक पानी के अलावा कुछ ना लें । इसके प्रयोग की विधि में सावधानी बरतनी पड़ती हैं । विभिन्न ऋतुओं के अनुसार इसके साथ गुड़, सैंधा नमक आदि विभिन्न वस्तुएं मिलाकर ले । हमारे यहाँ वर्ष भर में छ: ऋतुएँ होती है ।
 
  • नेत्र-प्रक्षलन : एक चम्मच त्रिफला चूर्ण रात को एक कटोरी पानी में भिगोकर रखें। सुबह कपड़े से छानकर उस पानी से आंखें धो लें। यह प्रयोग आंखों के लिए अत्यंत हितकर है। इससे आंखें स्वच्छ व दृष्टि सूक्ष्म होती है। आंखों की जलन, लालिमा आदि तकलीफें दूर होती हैं।
 
  • कुल्ला करना : त्रिफला रात को पानी में भिगोकर रखें। सुबह मंजन करने के बाद यह पानी मुंह में भरकर रखें। थोड़ी देर बाद निकाल दें। इससे दांत व मसूड़े वृद्धावस्था तक मजबूत रहते हैं। इससे अरुचि, मुख की दुर्गंध व मुंह के छाले नष्ट होते हैं।

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