केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण कानून के लागू होने को लेकर राज्यों, खासकर दक्षिण भारत की चिंताओं को दूर करने की कोशिश की है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि—
किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा
सभी राज्यों में सीटों की वृद्धि संतुलित और समानुपातिक होगी
सीटों में संभावित बढ़ोतरी
सरकारी सूत्रों के अनुसार—
संसद की सीटों में करीब 50% तक वृद्धि संभव
हर राज्य को समान रूप से प्रतिनिधित्व बढ़ाने का मौका
दक्षिणी राज्यों की “नुकसान” वाली आशंका को खारिज किया गया
लोकसभा सीटें बढ़ाने की योजना
केंद्र सरकार 16 अप्रैल को एक अहम संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश कर सकती है—
लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर लगभग 850 करने का प्रस्ताव
राज्यों से 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सदस्य चुने जा सकते हैं
इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन की तैयारी
महिला आरक्षण और परिसीमन का संबंध
लोकसभा और विधानसभा में 33% महिला आरक्षण लागू करने की योजना
इससे पहले परिसीमन प्रक्रिया पूरी की जाएगी
जनसंख्या और अन्य आधारों पर सीटों का पुनर्निर्धारण होगा
राजनीतिक बयानबाजी पर चेतावनी
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा—
कुछ लोग गलत आंकड़ों से दक्षिण भारत को गुमराह कर रहे हैं
महिला आरक्षण जैसे मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए
सभी दलों को “नारी शक्ति” के लिए एकजुट होना चाहिए
केंद्र सरकार का कहना है कि परिसीमन और महिला आरक्षण के जरिए पूरे देश में संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। अब इस मुद्दे पर अंतिम स्पष्टता संसद में चर्चा के बाद सामने आएगी।