संसद में पेश किए जाने वाले नए विधेयकों के तहत जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवैधानिक और राजनीतिक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी है।
इनमें प्रमुख हैं—
परिसीमन विधेयक 2026
संघ शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक
इनका उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन और प्रतिनिधित्व को नए सिरे से तय करना है।
PoK सीटों पर बड़ा प्रावधान
परिसीमन विधेयक 2026 का सबसे अहम पहलू—
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) के लिए भी प्रावधान
भविष्य में क्षेत्र मुक्त होने पर चुनाव आयोग को परिसीमन का अधिकार
भारत के “पूरा जम्मू-कश्मीर हमारा है” रुख को मजबूती
वर्तमान स्थिति और प्रस्तावित बदलाव
अभी जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 90 निर्वाचित सीटें
PoK की 24 सीटें खाली मानी जाती हैं
कुल संख्या में इन्हें शामिल नहीं किया जाता
प्रस्तावित बदलाव:
विधानसभा की कुल सीटें कम से कम 114 करने का प्रावधान
परिसीमन आयोग को सदस्य संख्या तय करने का अधिकार
परिसीमन आयोग को बढ़े अधिकार
संशोधन विधेयक के तहत—
परिसीमन आयोग को सीटों का पुनर्निर्धारण करने की शक्ति
पहले PoK क्षेत्रों को प्रक्रिया से बाहर रखा गया था, अब बदलाव संभव
महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर फोकस
अभी उपराज्यपाल 2 महिलाओं को नामित कर सकते हैं
प्रस्ताव: इसे बढ़ाकर 3 किया जाए
यह बदलाव नए परिसीमन के बाद लागू होगा
जनगणना और नए नियम
नए प्रावधानों के अनुसार—
सीटों का आवंटन नई जनगणना के आधार पर
संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन
आरक्षण और प्रतिनिधित्व नए ढांचे के अनुरूप
क्यों है यह बदलाव महत्वपूर्ण
जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक संरचना में बड़ा परिवर्तन
प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित बनाने की कोशिश
संवैधानिक ढांचे को आधुनिक और संगठित बनाना
ये प्रस्तावित विधेयक जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ भारत के दीर्घकालिक राजनीतिक दृष्टिकोण को भी स्पष्ट करते हैं। आने वाले समय में इन बदलावों का व्यापक असर देखने को मिल सकता है।