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अक्षय तृतीया: क्यों कहा जाता है अबूझ मुहूर्त? जानें महत्व

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अक्षय तृतीया एक ऐसा पावन दिन है जिसे हर प्रकार के शुभ कार्यों के लिए सर्वोत्तम माना गया है। “अबूझ मुहूर्त” होने के कारण इस दिन किसी भी समय बिना संकोच के कार्य शुरू किए जा सकते हैं। यानी इस दिन किसी विशेष शुभ समय की आवश्यकता नहीं होती।

अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व

अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का एक अत्यंत शुभ और पवित्र पर्व है, जिसे वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। “अबूझ” का अर्थ है जिसे सोचने-समझने की जरूरत न पड़े और “मुहूर्त” का मतलब है शुभ समय। इस तरह यह दिन ऐसा माना जाता है जब हर समय शुभ ही होता है, इसलिए बिना पंचांग देखे भी कोई भी अच्छा कार्य किया जा सकता है।

“अक्षय” शब्द का अर्थ होता है जो कभी समाप्त न हो। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य, दान, जप और तप का फल कभी नष्ट नहीं होता और जीवनभर बना रहता है।

पौराणिक मान्यताएं

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था, इसलिए इसे परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

इसके अलावा मान्यता है कि इसी दिन त्रेता युग का आरंभ हुआ था। महाभारत काल में भी इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को अक्षय पात्र प्रदान किया था, जिससे भोजन कभी समाप्त नहीं होता था। यही कारण है कि यह दिन समृद्धि और सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन किए जाने वाले शुभ कार्य

अक्षय तृतीया के दिन लोग बिना मुहूर्त निकाले कई शुभ कार्य करते हैं। इस दिन सोना-चांदी खरीदना विशेष रूप से शुभ माना जाता है, जो धन और समृद्धि का प्रतीक है।

इसके अलावा विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना, जमीन या मकान खरीदना जैसे कार्य भी इस दिन किए जाते हैं। किसान भी इस दिन खेती से जुड़े कार्यों की शुरुआत करते हैं, जिससे अच्छी फसल की कामना की जाती है।

दान और पूजा का महत्व

इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। गरीबों को भोजन, वस्त्र, जल और अन्य जरूरी चीजें दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। खासकर जल से भरे घड़े, पंखे, छाता और फल दान करना बहुत शुभ माना गया है।

अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और भक्त पूरे श्रद्धा भाव से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

बिना संकोच करें शुभ कार्य

अक्षय तृतीया आस्था, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। “अबूझ मुहूर्त” होने के कारण इस दिन किसी भी समय शुभ कार्य शुरू किए जा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए अच्छे कर्मों का फल कभी समाप्त नहीं होता, इसलिए यह दिन हर प्रकार के नए कार्य की शुरुआत के लिए बेहद शुभ माना जाता है।

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