केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार (16 अप्रैल) को स्पष्ट किया कि परिसीमन को लेकर यह अफवाह फैलाई जा रही है कि दक्षिणी राज्यों का लोकसभा में प्रतिनिधित्व घट जाएगा, जबकि हकीकत इसके उलट है। उन्होंने कहा कि परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों के सांसदों की संख्या बढ़कर 195 हो जाएगी।
अफवाहों पर लगाया विराम
लोकसभा में बोलते हुए शाह ने कहा कि संवैधानिक संशोधन और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है कि इससे दक्षिण को नुकसान होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीटों की कुल संख्या बढ़ने से किसी भी राज्य का मौजूदा प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा।
आंकड़ों से समझाया पूरा गणित
शाह ने बताया कि वर्तमान में 543 सीटों वाली लोकसभा में दक्षिणी राज्यों के 129 सांसद हैं, जो करीब 23.76% है। परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर 195 हो जाएगी और प्रतिशत भी बढ़कर लगभग 24% हो जाएगा।
उन्होंने अलग-अलग राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा—
कर्नाटक: 28 से बढ़कर 42 सीट
आंध्र प्रदेश: 25 से बढ़कर 38 सीट
तेलंगाना: 17 से बढ़कर 26 सीट
तमिलनाडु: 39 से बढ़कर 59 सीट
इन आंकड़ों से उन्होंने स्पष्ट किया कि सीटें और प्रतिनिधित्व दोनों में वृद्धि होगी।
तमिलनाडु और केरल को भी भरोसा
अमित शाह ने तमिलनाडु की जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य के प्रतिनिधित्व में कोई कमी नहीं आएगी। वहीं केरल की सीटों में भी वृद्धि की बात कही गई, जिससे स्पष्ट है कि सभी दक्षिणी राज्यों को लाभ मिलेगा।
निष्पक्षता बनाए रखने पर जोर
शाह ने कहा कि परिसीमन का उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या के अनुसार लोकसभा का विस्तार करना और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परिसीमन आयोग के कानून में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
2029 के बाद ही लागू होगा बदलाव
उन्होंने यह भी साफ किया कि परिसीमन आयोग की रिपोर्ट संसद और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही लागू होगी और 2029 से पहले इसका प्रभाव नहीं दिखेगा। तब तक सभी चुनाव वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही होंगे।
“प्रतिनिधित्व घटेगा नहीं, बढ़ेगा”
अमित शाह ने दोहराया कि दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम नहीं बल्कि बढ़ेगा। उन्होंने विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को खारिज करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होगी।