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राम मंदिर चंदा विवाद पर कांग्रेस का BJP पर हमला

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Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या राम मंदिर के चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। पार्टी ने प्रधानमंत्री की कथित चुप्पी पर सवाल उठाते हुए मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की है।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी भाजपा के दोहरे रवैये को उजागर करती है। उनका कहना है कि जिस राम मंदिर आंदोलन के सहारे भाजपा सत्ता तक पहुंची, उसी मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय विवाद पर अब सरकार जवाब देने से बच रही है।

PM मोदी से पूछे सवाल

समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में केसी वेणुगोपाल ने कहा कि इस मामले में कार्रवाई करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नैतिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा, “राम मंदिर का मुद्दा प्रधानमंत्री बनने की एक बड़ी वजह रहा है। यदि इतनी बड़ी कथित गड़बड़ी हुई है और प्रधानमंत्री चुप हैं, तो इससे भाजपा का दोहरा रवैया सामने आता है। राजनीतिक लाभ के लिए भगवान का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।”

वेणुगोपाल ने बताया कि उन्होंने एक दिन पहले प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की थी। उनका दावा है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर मामला है।

SIT जांच पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार द्वारा किया गया है, इसलिए राज्य सरकार की SIT से निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना कठिन है। उनके अनुसार, मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।

CBI जांच की मांग

केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जानी चाहिए और यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो, ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी रहे।

योगी सरकार पर भी साधा निशाना

कांग्रेस महासचिव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग कथित अनियमितताओं पर सवाल उठा रहे हैं, उनकी आलोचना करने के बजाय आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप सामने आए हैं, तो उनका निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से परीक्षण होना चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जनता का विश्वास बना रहे।

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