पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीटों पर चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं।
दूसरा चरण: 29 अप्रैल 2026
नतीजे: 4 मई 2026
सरकार बनाने के लिए 148 सीटों का बहुमत जरूरी है। इस चुनाव पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
बदला हुआ राजनीतिक परिदृश्य
इस बार का चुनाव 2021 से अलग है।
पिछले 5 वर्षों में राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है और सभी दल आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में हैं।
कांग्रेस का ‘मिशन कमबैक’
कांग्रेस पार्टी ने इस बार वाम दलों से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
पार्टी का लक्ष्य राज्य में अपनी खोई हुई पकड़ को फिर से मजबूत करना है।
पारंपरिक गढ़ों पर भरोसा
मालदा
मुर्शिदाबाद
नदिया
इन इलाकों में कांग्रेस को उम्मीद है कि वह अपने पुराने वोट बैंक को फिर से सक्रिय कर पाएगी।
इतिहास: 4 दशक का राज, फिर पतन
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने लगभग 4 दशकों तक शासन किया।
लेकिन 1977 के चुनावों में जनता ने पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया और पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।
कांग्रेस की बड़ी चुनौतियां
संसाधनों की कमी
कई जिलों में कमजोर संगठन
मजबूत क्षेत्रीय दलों से मुकाबला
इन कारणों से कांग्रेस के लिए वापसी आसान नहीं मानी जा रही है।
कांग्रेस इस चुनाव में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।हालांकि पार्टी अपने पारंपरिक गढ़ों के सहारे वापसी की कोशिश कर रही है, लेकिन असली फैसला बंगाल की जनता के हाथ में है कि 2026 में उसका रुझान किस ओर जाता है।