The New York Times और Pentagon के आकलन एक चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं।
फरवरी 2026 से शुरू हुए ईरान विरोधी अभियान में अमेरिका ने जिस तेजी से हथियारों का इस्तेमाल किया, वह उसकी उत्पादन क्षमता से कहीं ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिका की रक्षा तैयारियों में “रणनीतिक कमजोरी” पैदा हो सकती है।
तेजी से घट रहा आधुनिक हथियारों का भंडार
JASSM-ER क्रूज़ मिसाइल
इस्तेमाल: लगभग 1,100
शेष: करीब 1,500
चीन जैसे बड़े युद्ध के लिए अहम हथियार
टोमाहॉक मिसाइल
इस्तेमाल: 1,000+
प्रति मिसाइल लागत: ~$3.6 मिलियन (लगभग ₹34 करोड़)
खपत: सालाना खरीद से 10 गुना ज्यादा
पैट्रियट इंटरसेप्टर
इस्तेमाल: 1,200+
उत्पादन: सालाना ~600
अन्य हथियार
PrSM और ATACMS जैसी मिसाइलों का भी बड़े पैमाने पर उपयोग
HIMARS सिस्टम से लगातार हमले
➡️ निष्कर्ष: इस्तेमाल की गति उत्पादन से कहीं आगे निकल चुकी है।
युद्ध की भारी आर्थिक लागत
कुल खर्च: $28–35 बिलियन (₹2.6–3.3 लाख करोड़)
रोजाना खर्च: लगभग $1 बिलियन
शुरुआती 2 दिनों में ही: $5.6 बिलियन का गोला-बारूद इस्तेमाल
38 दिनों के अभियान में 13,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए गए।
सैन्य उपकरणों का नुकसान
एक बचाव मिशन के दौरान अमेरिकी सेना को खुद ही अपने उपकरण नष्ट करने पड़े:
2 MC-130 विमान
3 MH-6 हेलीकॉप्टर
कुल नुकसान: ~$275 मिलियन
वैश्विक सैन्य संतुलन पर असर
यूरोप
NATO की सुरक्षा पर असर
प्रशिक्षण अभ्यास कम
ड्रोन और गोला-बारूद की कमी
हिंद-प्रशांत
USS Abraham Lincoln को दक्षिण चीन सागर से हटाया गया
दक्षिण कोरिया से मिसाइल सिस्टम हटाए गए उत्तर कोरिया को लेकर चिंता बढ़ी
उत्पादन में बाधा और रणनीतिक जोखिम
हथियारों का भंडार फिर भरने में लग सकते हैं कई साल
सीनेटर जैक रीड ने चेतावनी दी कि मौजूदा उत्पादन दर पर्याप्त नहीं है
Lockheed Martin के साथ उत्पादन बढ़ाने की योजना फंडिंग के कारण अटकी
अमेरिका के भीतर बहस
White House का दावा है कि अमेरिकी सेना पूरी तरह सक्षम है।
हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि:
कुछ महत्वपूर्ण हथियार पहले से ही कम थे
अब कमी और बढ़ गई है
विशेषज्ञों की राय
विश्लेषकों के अनुसार, यह स्थिति अमेरिका की रक्षा रणनीति की कमजोरियों को उजागर करती है—
खासतौर पर महंगे और जटिल हथियारों पर अत्यधिक निर्भरता।
👉 सुझाव:
सस्ते और तेजी से बनने वाले हथियार (जैसे ड्रोन) पर अधिक निवेश
लंबी अवधि के युद्ध के लिए नई रणनीति
ईरान के साथ संघर्ष ने दिखा दिया है कि लंबे और तीव्र युद्ध में अमेरिका की सैन्य क्षमता भी सीमाओं से बंधी है।
हालांकि अमेरिका अब भी शक्तिशाली है, लेकिन घटते भंडार, धीमा उत्पादन और बढ़ती लागत भविष्य में बड़े रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकते हैं।