भगवान गणेश को समर्पित यह अत्यंत मधुर और भक्तिमय भजन श्रद्धालुओं के बीच काफी लोकप्रिय है। गणपति पूजा, गणेश चतुर्थी या किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में इस भजन का गायन और श्रवण विशेष फलदायी माना जाता है। आइए पढ़ते हैं श्री गणेश जी का यह सुंदर भजन।
गणेश जी का भजन
हे गणनायक सब सुखदायक
हे गणनायक सब सुखदायक,
करो विघ्न सब दूर,
शरण तेरी आए है ॥
रणत भवर गढ़ वास करो,
रिद्धि सिद्धि भंडार भरो,
प्रथम निमंत्रण स्वीकारो,
अटके कारज सिद्ध करो।
शिव गिरजा के कुंवर लाड़ला,
शिव गिरजा के कुंवर लाड़ला,
आस हमारी पूर,
शरण तेरी आए है ॥
हे गणनायक सब सुखदायक,
करो विघ्न सब दूर,
शरण तेरी आए है ॥
गणपति के दिव्य स्वरूप का वर्णन
स्वर्ण छत्र सिर पर धारी,
शोभित मुकुट छटा न्यारी,
चमक रह्या कुण्डल भारी,
मणि माला लागे प्यारी।
रत्न जड़ित पहने पैंजनिया,
रत्न जड़ित पहने पैंजनिया,
नैनन बरसे नूर,
शरण तेरी आए है ॥
हे गणनायक सब सुखदायक,
करो विघ्न सब दूर,
शरण तेरी आए है ॥
माता जगदम्बा के लाड़ले गणेश
मखमल वस्त्र बदन सोहे,
कुमकुम तिलक नयन मोहे,
माँ जगदम्बा लाड़ करे,
ठुमक-ठुमक कर नृत्य करे।
सुर-किन्नर यशगान सुनावे,
सुर-किन्नर यशगान सुनावे,
दर्शन दो भरपूर,
शरण तेरी आए है ॥
हे गणनायक सब सुखदायक,
करो विघ्न सब दूर,
शरण तेरी आए है ॥
मूषक वाहन वाले विघ्नहर्ता
मूषक वाहन है तेरा,
सूंड निराली सोहे है,
ऐसा अनुपम रूप तेरा,
देखत ही मन मोहे है।
बुद्धि बल से सब देवन का,
बुद्धि बल से सब देवन का,
किया मान-मद चूर,
शरण तेरी आए है ॥
हे गणनायक सब सुखदायक,
करो विघ्न सब दूर,
शरण तेरी आए है ॥
भजन का समापन
हे गणनायक सब सुखदायक,
करो विघ्न सब दूर,
शरण तेरी आए है ॥