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स्लीपर बस में नाबालिग से दरिंदगी: 398 पन्नों की चार्जशीट दाखिल

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admin
30 सितंबर 2026 | 11:53 am IST
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उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से नोएडा आ रही एक नाबालिग छात्रा से चलती स्लीपर बस में कथित गैंगरेप के मामले में दिल्ली पुलिस ने अदालत में 398 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। पुलिस ने आरोप पत्र 18 सितंबर 2026 को पेश किया था, जिस पर अदालत ने 24 सितंबर को संज्ञान लिया। चार्जशीट में फोरेंसिक रिपोर्ट, CCTV फुटेज और दर्जनों गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं।

परी चौक से बस में सवार हुई थी नाबालिग

पुलिस के मुताबिक, घटना 4 अगस्त 2026 की है। छात्रा ग्रेटर नोएडा के परी चौक से नोएडा सेक्टर-63 जाने के लिए बस में सवार हुई थी। आरोप है कि उसे बताया गया कि बस उसी दिशा में जाएगी।

जांच के अनुसार, बस में यात्रियों की मौजूदगी नहीं थी और बाद में बस दिल्ली की ओर बढ़ने लगी। इसी दौरान बस के ड्राइवर और कंडक्टर पर छात्रा के साथ कथित यौन उत्पीड़न का आरोप है।

बस करीब 47 किलोमीटर का सफर तय कर ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कश्मीरी गेट पहुंची, जहां छात्रा को उतारा गया। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।

CCTV से बस तक पहुंची पुलिस

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से बस का पता लगाया। जांच में दो CCTV रिकॉर्डिंग भी अहम मानी गई हैं—एक में छात्रा को परी चौक पर बस में चढ़ते और दूसरी में कश्मीरी गेट पर उतरते हुए दिखाया गया है।

मामले में बस के ड्राइवर और कंडक्टर को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने दोनों को भारतीय न्याय संहिता की गैंगरेप और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराओं के साथ POCSO Act के प्रावधानों के तहत आरोपी बनाया है।

DNA और फोरेंसिक रिपोर्ट बनी अहम सबूत

चार्जशीट में फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, बस और पीड़िता के कपड़ों से बरामद जैविक नमूनों की जांच की गई। रिपोर्ट में वीर्य और बालों के नमूनों सहित कई फोरेंसिक सबूतों का उल्लेख किया गया है। पुलिस का कहना है कि DNA मिलान जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

गवाहों के बयान भी चार्जशीट में शामिल

अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में गवाहों की संख्या 50 से 51 बताई गई है। इनमें छात्रा के रिश्तेदार, बस मालिक, बस रिपेयरिंग से जुड़े कर्मचारी, सार्वजनिक गवाह और जांच से जुड़े अधिकारी शामिल हैं।

पुलिस ने बस से कपड़े के टुकड़े, फिंगरप्रिंट और अन्य सामग्री भी जब्त की थी। जांच में CCTV फुटेज के डिजिटल रिकॉर्ड को भी सुरक्षित कर चार्जशीट का हिस्सा बनाया गया है।

मामला अब अदालत में विचाराधीन है और आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।