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धारी देवी मंदिर: दिन में तीन बार स्वरूप बदलती हैं मां काली

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admin
6 अक्टूबर 2026 | 11:09 am IST
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देवभूमि उत्तराखंड में स्थित धारी देवी मंदिर मां काली को समर्पित एक प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर स्थानीय लोगों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ देशभर में भी प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धारी देवी को चार धाम की रक्षक और उत्तराखंड की संरक्षक देवी माना जाता है। मंदिर से जुड़ी कई ऐसी मान्यताएं हैं, जो इसे बेहद खास बनाती हैं।

कहां स्थित है धारी देवी मंदिर?

धारी देवी मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच कलियासौड़ में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। धारी माता को देवी कालीसौर के नाम से भी जाना जाता है। देवी के दर्शन और आशीर्वाद के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर के पास एक प्राचीन गुफा भी मौजूद है, जिसे इस स्थान की धार्मिक और ऐतिहासिक विशेषताओं से जोड़कर देखा जाता है।

दिन में तीन बार बदलता है मां का स्वरूप

स्थानीय मान्यता के अनुसार, मंदिर में स्थापित धारी देवी की प्रतिमा दिन में तीन बार अपना स्वरूप बदलती है। सुबह देवी का स्वरूप छोटी बालिका जैसा, दोपहर में युवा महिला जैसा और शाम के समय वृद्ध महिला जैसा दिखाई देता है। यही मान्यता धारी देवी मंदिर को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग और विशेष बनाती है।

कैसे प्रकट हुईं धारी देवी?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार भीषण बाढ़ में मंदिर बह गया था। इसके बाद धारी देवी की मूर्ति धारो गांव के पास एक चट्टान के निकट आकर रुक गई। कहा जाता है कि ग्रामीणों को मूर्ति की ओर से विलाप की आवाज सुनाई दी। इसके बाद उन्हें मूर्ति को उसी स्थान पर स्थापित करने का निर्देश मिला। ग्रामीणों ने मिलकर वहां देवी की प्रतिमा स्थापित की।

2013 की केदारनाथ आपदा से भी जुड़ी मान्यता

धारी देवी मंदिर से वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा से जुड़ी एक मान्यता भी प्रचलित है। स्थानीय लोगों के अनुसार, आपदा से पहले मंदिर को उसके मूल स्थान से स्थानांतरित किया गया था। मान्यता है कि देवी की प्रतिमा के स्थान परिवर्तन के कारण क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा आई। हालांकि, यह एक स्थानीय धार्मिक मान्यता है और इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। बाद में उसी स्थान पर मंदिर का पुनर्निर्माण कर देवी की प्रतिमा को स्थापित किया गया।

मंदिर की क्या है खासियत?

धारी देवी को उत्तराखंड की रक्षक देवी और चारों धाम की संरक्षक के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह मंदिर 108 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

धारी देवी की प्रतिमा का ऊपरी हिस्सा मंदिर में पूजनीय है, जबकि मान्यता के अनुसार प्रतिमा का निचला हिस्सा रुद्रप्रयाग स्थित कालीमठ में पूजा जाता है। श्रद्धालुओं के बीच यह भी मान्यता है कि धारी देवी के दर्शन के बिना चार धाम यात्रा अधूरी मानी जाती है।

नवरात्रि में होती है विशेष पूजा

नवरात्रि के दौरान धारी देवी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां कालीसौर के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और सुख-समृद्धि तथा परिवार की रक्षा के लिए देवी का आशीर्वाद लेते हैं।