Parliament Row: संसद परिसर में हुए ‘राम मंदिर स्किट’ विवाद को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (SP) के वरिष्ठ सांसद राम गोपाल यादव ने सोमवार को सरकार पर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि संसद परिसर में हुई घटना उचित नहीं थी और ऐसा नहीं होना चाहिए था।
सरकार पर साधा निशाना
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में राम गोपाल यादव ने कहा कि सरकार ने सनातन धर्म के अपमान के आरोप में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद समेत कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक मुद्दों पर काम करने के बजाय राजनीतिक नैरेटिव बनाने और विपक्ष पर दोष मढ़ने में अधिक रुचि रखती है।
‘संतों का चोरी से कोई संबंध नहीं’
राम गोपाल यादव ने कहा कि राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के आरोपों का संतों से कोई संबंध नहीं है। उनके अनुसार, इस तरह की प्रस्तुति उचित नहीं थी।
उन्होंने कहा, “संतों का चोरी से कोई वास्ता नहीं है। जो हुआ, वह गलत था और ऐसा नहीं होना चाहिए था।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि सरकार सकारात्मक और रचनात्मक कार्य नहीं करेगी तो स्वस्थ लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के लिए भी माहौल नहीं बनेगा। सरकार तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और दूसरों पर आरोप लगाने में अधिक ध्यान दे रही है।
ओम प्रकाश राजभर ने भी उठाए सवाल
राम गोपाल यादव की यह प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बयान के बाद आई है।
राजभर ने संसद परिसर में हुए ‘राम मंदिर स्किट’ को लेकर समाजवादी पार्टी के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने पार्टी सांसदों राजीव राय, पवन पांडे और अवधेश प्रसाद के अलग-अलग बयानों का हवाला देते हुए पूछा कि क्या समाजवादी पार्टी का आधिकारिक रुख सिद्धांतों से तय होता है या फिर राजनीतिक समीकरणों और वोट बैंक की राजनीति से।
पप्पू यादव के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस
इस विवाद के बीच बीजेपी सांसद और लोकसभा के मुख्य सचेतक संजय जायसवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस सौंपा है।
यह नोटिस लोकसभा के कार्य संचालन एवं प्रक्रिया नियम 222 और 223 के तहत दिया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि निर्दलीय सांसद पप्पू यादव का व्यवहार सांसद की गरिमा के अनुरूप नहीं था।
क्या है पूरा मामला?
31 जुलाई को संसद परिसर के मकर द्वार के पास विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर एक सांकेतिक नाटक (स्किट) प्रस्तुत किया था।
इस दौरान पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर मंदिर के पुजारी की भूमिका में नजर आए, जबकि अन्य विपक्षी सांसदों ने कथित चंदा बॉक्स और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत किया।
इस घटना के बाद भाजपा ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने और संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य बताया, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक विरोध का एक माध्यम बता रहा है। अब यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।







