वर्किंग मदर्स की चुनौतियों पर क्या बोलीं स्मृति ईरानी?
स्मृति ईरानी ने कहा कि अधिकांश कामकाजी माताओं को अपने जीवन के वे शुरुआती साल ठीक से याद भी नहीं रहते, क्योंकि वे एक साथ कई जिम्मेदारियां निभाने में व्यस्त रहती हैं।
उन्होंने कहा कि एक मां को एक ही समय में—
नौकरी की जिम्मेदारियां निभानी होती हैं,
बच्चों को खाना खिलाना होता है,
उनका होमवर्क पूरा कराना होता है,
और अपने पेशेवर काम भी समय पर पूरे करने होते हैं।
उन्होंने बताया कि कई बार ऐसी रातें भी आती हैं जब मां अपनी जिम्मेदारियों के कारण ठीक से सो भी नहीं पाती।
अभी नैपी बदल रही थी, अब बच्चा जवाब देने लगा’
अपने संबोधन के दौरान स्मृति ईरानी ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि बच्चों का बचपन बहुत जल्दी बीत जाता है।
उन्होंने कहा,“अभी तो ऐसा लगता है कि मैं उसकी नैपी बदल रही थी और देखते ही देखते वही बच्चा अब पलटकर जवाब देने लगा है।”
उनकी इस बात पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने मुस्कुराते हुए सहमति जताई।
मां होने का असली अर्थ तब समझ आता है’
स्मृति ईरानी ने कहा कि मातृत्व केवल बच्चों की परवरिश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सफर है जिसका वास्तविक अर्थ तब समझ आता है जब बच्चे आत्मनिर्भर होकर अपनी अलग दुनिया बसा लेते हैं।
उन्होंने कहा,“मां होने का एहसास ऐसा ही होता है। यह एक ऐसा काम है जो तभी पूरा माना जाता है, जब बच्चे को आपकी जरूरत न रहे। और यही इसकी सबसे भावुक सच्चाई है।”
आप बच्चों को बड़ा इसलिए करते हैं कि वे अपनी राह चुन सकें’
अपने भाषण में स्मृति ईरानी ने मातृत्व की भावनात्मक यात्रा को बेहद संवेदनशील शब्दों में बयां किया।
उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों को इसलिए बड़ा करते हैं ताकि वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें, अपनी जिंदगी जी सकें और भविष्य में किसी सहारे के मोहताज न रहें।
इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि जीवन का एक बड़ा हिस्सा बच्चों को संवारने में बीत जाता है और समय के साथ वे अपनी नई दुनिया में आगे बढ़ जाते हैं।
आधी जिंदगी इसलिए बिताई कि आगे बच्चे अपने पैरों पर खड़े हो जाएं’
स्मृति ईरानी ने कहा कि जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो मां के पास अक्सर उनकी यादें, तस्वीरें और कभी-कभार आने वाले संदेश ही रह जाते हैं।
उन्होंने मातृत्व की इसी भावनात्मक यात्रा को शब्द देते हुए कहा कि मां अपने जीवन का बड़ा हिस्सा बच्चों को इस काबिल बनाने में लगा देती है कि वे भविष्य में आत्मनिर्भर होकर अपनी राह चुन सकें।
मातृत्व को बताया सबसे बड़ी ताकत
स्मृति ईरानी ने कहा कि अक्सर महिलाओं को “बहुत भावुक” कहकर कम आंका जाता है, जबकि यही संवेदनशीलता उनकी सबसे बड़ी शक्ति होती है।
उन्होंने कहा कि यही भावनाएं महिलाओं को—
ईमानदारी से जिम्मेदारियां निभाने,
कठिन परिस्थितियों में डटे रहने,
लगातार मेहनत करने,
और असफलताओं से उबरकर दोबारा आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
‘मां का प्यार और महिला की दृढ़ता खरीदी नहीं जा सकती’
अपने संबोधन के अंत में स्मृति ईरानी ने कहा कि धन से बहुत सी चीजें खरीदी जा सकती हैं, लेकिन एक मां का निस्वार्थ प्रेम और एक महिला की दृढ़ इच्छाशक्ति कभी खरीदी नहीं जा सकती।
उन्होंने कहा कि जो लोग महिलाओं की इस शक्ति को समझते हैं, वही वास्तव में सही मायनों में दूरदर्शी और समझदार होते हैं।
फिर चर्चा में हैं स्मृति ईरानी
स्मृति ईरानी इन दिनों एक बार फिर टीवी पर लोकप्रिय धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी के किरदार में नजर आ रही हैं। निजी जीवन में उनकी शादी व्यवसायी जुबिन ईरानी से हुई है और उनके तीन बच्चे हैं।







