भारतीय उद्योग जगत के प्रमुख कारोबारी समूहों में शामिल Tata Sons के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को अगले पांच वर्षों के लिए फिर से चेयरमैन नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मुंबई में हुई Tata Sons के बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया। 2017 से समूह का नेतृत्व कर रहे 63 वर्षीय चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के बाद Tata Sons के शीर्ष पद पर उनका कार्यकाल अगले पांच वर्षों तक जारी रहेगा।
चंद्रशेखरन ने पहले पद छोड़ने की जताई थी इच्छा
चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को कहा था कि मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद वह तीसरे कार्यकाल के लिए पद पर बने नहीं रहना चाहते। अब नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी उनसे अपने इस फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह कर सकती है।
बताया गया है कि अगस्त में पद छोड़ने का फैसला रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के निर्देश से पहले और Tata Sons के रेगुलेटरी ढांचे को लेकर अलग-अलग विचारों के बीच लिया गया था।
नोएल टाटा ने नियुक्ति के खिलाफ किया वोट
सूत्रों के मुताबिक, Tata Trusts के चेयरमैन और Tata Sons के बोर्ड सदस्य नोएल टाटा एकमात्र ऐसे डायरेक्टर थे, जिन्होंने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया।
नोएल टाटा Tata Sons की संभावित लिस्टिंग का विरोध करते रहे हैं और बताया जाता है कि फरवरी से उनका रुख इसी तरह बना हुआ है। दूसरी ओर, Tata Sons में करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले Shapoorji Pallonji Group ने लिस्टिंग का समर्थन किया है।
2017 में संभाली थी Tata Sons की कमान
एन चंद्रशेखरन ने 2017 में Tata Sons के चेयरमैन का पद संभाला था। उन्होंने साइरस मिस्त्री को बोर्ड द्वारा हटाए जाने के बाद रतन टाटा की जगह यह जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद 2022 में उन्हें दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्त किया गया था।
अगस्त में चंद्रशेखरन के पद छोड़ने की योजना की जानकारी ऐसे समय सामने आई थी, जब Tata Sons की प्रस्तावित लिस्टिंग, Air India, Tata Digital और BigBasket जैसे नए ग्रुप वेंचर्स के लिए पूंजी आवंटन समेत कई मुद्दों पर मतभेद की खबरें थीं।
उत्तराधिकारी के नामों पर भी हुई थी चर्चा
फरवरी में करीब तीन घंटे चली बोर्ड बैठक के दौरान नोएल टाटा की ओर से चिंताएं जताए जाने के बाद चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर फैसला टाल दिया गया था। इसके बाद संभावित उत्तराधिकारियों के नामों पर भी विचार शुरू हुआ।
संभावित दावेदारों में Tata Steel के CEO टी.वी. नरेंद्रन, Tata Sons के ग्रुप CFO सौरभ अग्रवाल और NSE के CEO आशीष चौहान समेत कुछ अन्य आंतरिक उम्मीदवारों के नाम सामने आए थे।
Tata Sons की लिस्टिंग पर भी नजर
Tata Sons की संभावित लिस्टिंग को भारत के बड़े IPO में से एक माना जा रहा है। अनुमान के मुताबिक, कंपनी की 1 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री से करीब ₹15,000-20,000 करोड़ जुटाए जा सकते हैं। इससे Tata Sons का अनुमानित वैल्यूएशन करीब ₹20 लाख करोड़ या लगभग 230 अरब डॉलर बैठ सकता है।
Tata Group की स्टील, ऑटोमोबाइल, आईटी, हॉस्पिटैलिटी और एविएशन समेत कई क्षेत्रों में मौजूदगी है। समूह की एक दर्जन से अधिक सूचीबद्ध कंपनियों में नियंत्रक हिस्सेदारी है, जबकि इसके पास बड़ी संख्या में गैर-सूचीबद्ध कंपनियों का पोर्टफोलियो भी है।







