मुंबई, 3 नवंबर। भारतीय रुपये ने मंगलवार को शुरुआती कारोबार में मजबूती दर्ज की। घरेलू शेयर बाजार में तेजी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेशकों की खरीदारी से रुपये को समर्थन मिला। शुरुआती कारोबार में रुपया 12 पैसे मजबूत होकर 94.72 प्रति डॉलर पर पहुंच गया।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, घरेलू बाजार में विदेशी पूंजी का प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट रुपये के लिए सकारात्मक रही। हालांकि, अमेरिका में महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनाव से पहले डॉलर की मजबूती और वैश्विक निवेशकों की सतर्कता के कारण रुपये की बढ़त सीमित रही।
शुरुआती कारोबार में 94.60 तक पहुंचा रुपया
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया मंगलवार को 94.68 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह मजबूत होकर 94.60 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि, बाद में इसमें कुछ गिरावट आई और यह 94.72 प्रति डॉलर पर कारोबार करने लगा।
यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 12 पैसे की बढ़त दर्शाता है। सोमवार को रुपया आठ पैसे कमजोर होकर 94.84 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
डॉलर सूचकांक में मामूली बढ़त
दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.03 प्रतिशत बढ़कर 101.65 पर पहुंच गया।
अमेरिकी डॉलर में इस मामूली मजबूती के बावजूद घरेलू बाजार से मिले समर्थन के कारण रुपये में तेजी देखने को मिली।
सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल
घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी रही। बीएसई सेंसेक्स 551.77 अंक उछलकर 76,244.55 अंक पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 129.60 अंक की बढ़त के साथ 23,570.40 अंक पर कारोबार करता दिखाई दिया।
शेयर बाजार में तेजी से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और रुपये को भी सहारा मिला।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 0.01 प्रतिशत गिरकर 104.76 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारत के लिए राहत की बात है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
विदेशी निवेशकों की लगातार दूसरे दिन खरीदारी
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) सोमवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में शुद्ध खरीदार रहे। उन्होंने इस दौरान 3,114.68 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की।
विदेशी निवेशकों की इस खरीदारी से घरेलू शेयर बाजार को समर्थन मिला और रुपये की मजबूती को भी मदद मिली।







