भारतीय शतरंज के युवा ग्रैंडमास्टर आर प्रग्नानंदा ने नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट में एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 20 वर्षीय इस खिलाड़ी ने टूर्नामेंट के आठवें राउंड में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को उनके घरेलू मैदान पर मात देकर इतिहास रच दिया। इस शानदार जीत के साथ प्रग्नानंदा ने भारत के दिग्गज शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद के 19 साल पुराने रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली।
जीत के बाद भी शांत और लक्ष्य पर केंद्रित प्रग्नानंदा
इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने के बावजूद प्रग्नानंदा उत्साह में बहने के बजाय पूरी तरह अपने लक्ष्य पर केंद्रित नजर आए। मैच के बाद उन्होंने कहा कि उनके लिए कार्लसन को हराने से ज्यादा महत्वपूर्ण टूर्नामेंट में जीत दर्ज करना था।
उन्होंने कहा, “मैग्नस को हराने से कहीं अधिक जरूरी इस समय टूर्नामेंट में कोई भी मुकाबला जीतना है। मैं खुश हूं कि मैं ऐसा कर सका।”
कार्लसन के बचाव कौशल की की जमकर तारीफ
प्रग्नानंदा ने जीत के बावजूद मैग्नस कार्लसन के खेल की सराहना की। उन्होंने कहा कि कार्लसन आखिरी क्षण तक मुकाबले में बने रहे और लगातार बेहतरीन बचाव करते रहे।
प्रग्नानंदा के अनुसार, कई खिलाड़ी ऐसी स्थिति में दबाव में आकर गलतियां कर बैठते, लेकिन कार्लसन लगातार सही चालें चलते रहे। उन्होंने स्वीकार किया कि एक समय उन्हें भी लगा था कि मुकाबला ड्रॉ की ओर बढ़ रहा है।
टाइम स्क्रैम्बल बना चिंता का विषय
भारतीय ग्रैंडमास्टर ने अपनी मौजूदा फॉर्म पर संतोष जताया, लेकिन समय प्रबंधन को सुधार की जरूरत वाला क्षेत्र बताया।
उन्होंने कहा, “कुल मिलाकर मैं अच्छा खेल रहा हूं, लेकिन टाइम स्क्रैम्बल मेरे पक्ष में नहीं रहे हैं। आगे मैं घड़ी में ज्यादा समय बचाने की कोशिश करूंगा और उसी आत्मविश्वास के साथ खेलता रहूंगा।”
अब विश्व चैंपियन गुकेश से होगी टक्कर
आराम के दिन के बाद प्रग्नानंदा टूर्नामेंट के अंतिम दो राउंड में उतरेंगे। उनका अगला मुकाबला मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश से होगा। इसके बाद आखिरी राउंड में उनका सामना जर्मनी के ग्रैंडमास्टर विंसेंट कीमर से होगा।
इन दोनों मुकाबलों को टूर्नामेंट के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
खिताब की दौड़ में बने हुए हैं प्रग्नानंदा
आठ राउंड के बाद प्रग्नानंदा 12 अंकों के साथ अंकतालिका में तीसरे स्थान पर हैं। उनसे आगे वेस्ली सो 14 अंकों के साथ शीर्ष पर हैं, जबकि अलीरेज़ा फ़िरोज़ा 13 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर मौजूद हैं।
अंतिम दो मुकाबलों में अधिकतम अंक हासिल कर प्रग्नानंदा के पास न केवल पोडियम पर जगह बनाने, बल्कि खिताब जीतने की दौड़ में भी बने रहने का सुनहरा अवसर है। भारतीय शतरंज प्रेमियों की नजरें अब उनके आगामी मुकाबलों पर टिकी हुई हैं।