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TMC का दावा- फर्जी है सांसदों की बगावत की खबर

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तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संसदीय दल में कथित फूट और 20 सांसदों द्वारा एनडीए (NDA) को समर्थन देने की खबरों के बीच पार्टी ने जोरदार पलटवार किया है। टीएमसी नेतृत्व ने सांसदों की बगावत और हस्ताक्षरित सूची से जुड़े दावों को पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत बताया है।

पार्टी नेताओं का आरोप है कि यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से फैलाया गया दुष्प्रचार है, जिसका मकसद राजनीतिक भ्रम पैदा करना है। इस विवाद के बीच टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और कल्याण बनर्जी ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

क्या है पूरा विवाद?

हाल के दिनों में ऐसी खबरें सामने आईं कि टीएमसी के 20 से अधिक सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अलग राजनीतिक समूह बनाने या एनडीए को समर्थन देने की इच्छा जताई है।

रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सांसदों की संख्या इतनी है कि वे संसद में अलग गुट के रूप में भी काम कर सकते हैं। हालांकि, टीएमसी नेताओं ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

कीर्ति आजाद ने बताया फर्जी दस्तावेज

टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कथित सूची को फर्जी और मनगढ़ंत बताया।

BJP पर लगाया दुष्प्रचार का आरोप

कीर्ति आजाद ने दावा किया कि यह सूची भाजपा द्वारा फैलायी गई है और इसमें शामिल कई नेताओं ने किसी भी प्रकार के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है।

उन्होंने कहा कि कथित सूची में शामिल छह सांसदों ने साफ कर दिया है कि उन्होंने किसी भी पत्र या दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

‘ऑपरेशन लोटस फेल हो गया’

कीर्ति आजाद ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि कथित ‘ऑपरेशन लोटस’ पूरी तरह विफल हो गया है।

उन्होंने लिखा, “यह फर्जी और मनगढ़ंत सूची भाजपा ने फैलाई है। इनमें से छह लोगों ने किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार किया है। ऑपरेशन लोटस फेल हो गया है। अमित शाह फेल हो गए हैं।”

कल्याण बनर्जी ने भी उठाए सवाल

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने भी कथित बगावत और लोकसभा अध्यक्ष को लिखे गए पत्र की खबरों पर सवाल खड़े किए।

स्पीकर को भेजे गए पत्र पर संदेह

कल्याण बनर्जी ने कहा कि 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कथित पत्र सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने दावा किया कि स्पीकर कार्यालय की ओर से भी ऐसा कोई पत्र मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।

BJP नेताओं से मुलाकात पर सवाल

उन्होंने कुछ टीएमसी नेताओं की वरिष्ठ भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के साथ कथित बैठक का उल्लेख करते हुए पूछा कि यह बैठक किसने आयोजित करवाई और इसके पीछे कौन लोग थे।

‘जो जाना चाहते हैं, खुलकर BJP में जाएं’

कल्याण बनर्जी ने कहा कि यदि कोई नेता वास्तव में टीएमसी छोड़ना चाहता है तो उसे खुलकर भाजपा में शामिल होना चाहिए।

दलबदल कानून का भी किया जिक्र

उन्होंने कहा कि पार्टी से अलग होने की कोशिश करने वाले नेताओं को संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून के तहत कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

उनके मुताबिक, ऐसे नेताओं को अंततः औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होना पड़ सकता है यदि वे अयोग्यता से बचना चाहते हैं।

बागी नेताओं पर साधा निशाना

कल्याण बनर्जी ने कथित रूप से बागी नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान यही नेता ममता बनर्जी की तारीफ करते नहीं थकते थे, लेकिन अब पार्टी पर सवाल उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जो नेता पहले हर मंच से ममता बनर्जी की प्रशंसा करते थे, वे अब यह दावा कर रहे हैं कि टीएमसी में रहते हुए विकास कार्य नहीं कर पा रहे थे।

‘पार्टी के साथ किया विश्वासघात’

कल्याण बनर्जी ने कहा, “अगर वे भाजपा में शामिल होना चाहते हैं तो खुलकर जाएं, भाजपा का टिकट लें और चुनाव लड़ें। पार्टी के साथ धोखा करने वालों को जनता जवाब देगी।”

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे नेताओं ने टीएमसी और उसके नेतृत्व के साथ विश्वासघात किया है तथा अब वे अपने राजनीतिक हितों के लिए नई राह तलाश रहे हैं।

TMC ने किया एकजुटता का दावा

इन तमाम अटकलों के बीच टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सांसदों की बगावत की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। पार्टी का दावा है कि विपक्षी दलों द्वारा भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इससे संगठन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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