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आज की कहानी:शैलपुत्री

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माँ दुर्गा का पहला ईश्वरीय स्वरुपशैलपुत्रीहै। शैल का अर्थ है शिखर। शास्त्रों में शैलपुत्री को पर्वत (शिखर) की बेटी के नाम से जाना जाता है। आमतौर पर यह समझा जाता है कि देवी शैलपुत्री कैलाश पर्वत की पुत्री हैं। लेकिन यह बहुत ही सतही विचार है। इसका योग के मार्ग पर वास्तविक अर्थ है – चेतना का सर्वोच्चतम स्थान। यह बहुत दिलचस्प है कि जब ऊर्जा अपने चरम स्तर पर होती है तभी आप इसका अनुभव कर सकते हैं। इससे पहले कि यह अपने चरम स्तर पर न पहुँच जाए तब तक आप इसे समझ नहीं सकते क्योंकि चेतना की अवस्था का यह सर्वोत्तम स्थान है जो ऊर्जा के शिखर से उत्पन्न हुआ है। यहाँ पर शिखर का मतलब है, हमारे गहरे अनुभव या गहन भावनाओं का सर्वोच्चतम स्थान। जब व्यक्ति 100% क्रोध में होता है तो महसूस करेंगे कि क्रोध शरीर को कमजोर कर देता है। दरअसल हम क्रोध को पूरी तरह से व्यक्त नहीं करते, जब 100% क्रोध में होते हैं, और पूरी तरह से क्रोध को व्यक्त करें तो इस स्थिति से जल्द ही बाहर निकल सकते हैं। जब 100% किसी भी चीज में होते हैं, तभी उसका उपभोग कर सकते हैं। ठीक इसी तरह जब क्रोध को पूरी तरह से व्यक्त करेंगे तब ऊर्जा की उछाल का अनुभव करेंगे और साथ ही तुरंत क्रोध से बाहर निकल जाएँगे। क्या कभी देखा है कि बच्चे कैसे व्यवहार करते हैं? जो भी वे करते हैं, 100% करते हैं। अगर वे क्रोध में हैं, तो वे उस पल में 100% गुस्से में हैं, और फिर तुरंत कुछ ही मिनटों के बाद वे उस क्रोध को भी छोड़ देते हैं। अगर वे नाराज हो जाते हैं, तो भी वे थकते नहीं। लेकिन अगर आप क्रोध हो जाते हैं तो आपका क्रोध आपको थका देता है। ऐसा क्यों है? ऐसा इसलिए है क्योंकि आप अपना क्रोध 100% व्यक्त नहीं करते। अब इसका मतलब यह नहीं है कि आप हर समय नाराज ही रहें। तब आपको उस परेशानी का भी सामना करना पड़ेगा जिसकी वजह से क्रोध आता है।
जब आप किसी भी अनुभव या भावना के शिखर तक पहुँचते हैं तो आप दिव्य चेतना के उद्भव का अनुभव करते हैं, क्योंकि यह चेतना का सर्वोत्तम शिखर है। शैलपुत्री का यही वास्तविक अर्थ है।
माँ शैलपुत्री की पूजा में कौन से मन्त्र का जाप करें?
‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:’ मन्त्र के जप से आप माँ दुर्गा के पहले स्वरुप माँ शैलपुत्री की आराधना कर सकते हैं।
नवरात्रि की प्रतिपदा को पहनें सफेद रंग के कपड़े।
प्रतिपदा: नवरात्रि के नौ रंग देवी के विशिष्ट गुणों का प्रतीक है।

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