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आज की कहानी

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भगवान राम के जीवन से जुड़ी कई धार्मिक कहानियां प्रचलित है. ऐसी ही एक कहानी है जब भगवान राम पिता की आज्ञा पाने के बाद वन जाते हैं तो उनके छोटे भाई भरत मनाने आते हैं. लेकिन उनके पहुंचने से पहले वन गए लक्ष्मण काफी ज्यादा क्रोधित होते हैं और भरत को भला बुरा कहते हैं. जानिए तब प्रभु राम लक्ष्मण को क्या शिक्षा देते हैं.

दासी मंथरा के प्रपंच के बाद भगवान राम लक्ष्मण और माता सीता वन को चली जाती हैं. उनके जाने के बाद पूरी अयोध्या में सूनापन छा जाता है.

जिस समय भगवान राम वन को जाते हैं उस समय भरत अपने ननिहाल (मामा के घर) में थे. जब वो वापस अयोध्या लौटे तब उन्हें ये सूचना मिली.

जब उन्हें ये सूचना मिली तो वो व्यतिथ हो गए. अपनी माता कैकेयी को उन्होंने भला बुरा कहा और गुरू वशिष्ट से सलाह लेते हैं और अपने भाई राम को वापस लाने की बात कहते हैं. इसके बाद भरत गुरू वशिष्ट माता कैकेयी, सुमित्रा कौशिल्या भाई शत्रुध्न के साथ भगवान राम को मनाने चित्रकूट जाते हैं. जैसे ही ये सूचना लक्ष्मण को मिलती है वो क्रोधित हो जाते हैं और भरत को भला बुरा कहते हैं.

लक्ष्मण क्रोध में कहते हैं कि अगर मैं सुमित्रा का पुत्र हूं तो भरत का सारा गर्व चूर कर दूंगा और उसे इस मिट्टी में सूला दूंगा.

इस पर भगवान राम लक्ष्मण को समझाते हैं कि अगर मान भी लो भरत बदल भी गया है तो लक्ष्मण तुम निहत्थे कैसे उसका सामना करोगे.

इसके अलावा कहते हैं कि भरत भाई है और माता कैकेयी ने उसके लिए राज मांगा लेकिन उसमें उसकी कोई भी राय नहीं थी. भाई- भाई में फूट बढ़ जाए ये अच्छी बात नहीं लक्ष्मण.

फिर भरत की तारीफ करते हुए कहते हैं कि पाप जिसकी सोच से बाहर खड़ा हो जाता है वो भरत हमसे युद्ध नहीं कर सकता है. इसलिए लक्ष्मण अपने क्रोध को काबू  में करो.इसके बाद भरत दल बल के साथ चित्रकूट पहुंचते हैं और भाई राम और लक्ष्मण के गले लग कर रोने लगते हैं और अपनी माता की गलती का प्रायश्चित करते हैं.

राम से भरत कहते हैं भी हैं कि आप माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या में राज करिए हम वन में रहेंगे. इस पर लक्ष्मण को अपनी गलती का एहसास होता है और भरत से अपनी गलती मानते हैं.

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