जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। सोमवार को रामनगर-उधमपुर हाईवे पर कागोते गांव के पास एक यात्री बस हादसे का शिकार हो गई, जिसमें कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि बस एक सुदूर गांव से उधमपुर की ओर जा रही थी, तभी यह भीषण दुर्घटना हुई। प्रशासन ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या अभी बढ़ सकती है, क्योंकि कुछ यात्री मलबे में दबे हुए हैं और राहत-बचाव कार्य जारी है।
कैसे हुआ हादसा
स्थानीय लोगों के अनुसार, कागोते गांव के पास बस चालक का नियंत्रण वाहन से हट गया, जिससे बस सड़क से फिसलकर पलट गई।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बस की रफ्तार काफी तेज थी, जो हादसे का मुख्य कारण मानी जा रही है।
घायलों का इलाज जारी
इस हादसे में कई लोग घायल भी हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। उधमपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) अस्पताल को अलर्ट पर रखा गया है, ताकि घायलों को तुरंत इलाज मिल सके।
प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी घायलों को जल्द से जल्द बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
मौके पर पहुंची प्रशासनिक टीम
हादसे की सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं।
बचाव अभियान लगातार जारी है और मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने जताया दुख
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने उधमपुर के जिला आयुक्त से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली और कहा कि वे लगातार प्रशासन के संपर्क में हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि राहत-बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया है और हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। गंभीर रूप से घायलों को जरूरत पड़ने पर एयरलिफ्ट करने की व्यवस्था भी की जा रही है।
एक दिन पहले भी हुआ था हादसा
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले राजौरी जिले में भी एक सड़क हादसा हुआ था, जिसमें एक यात्री वाहन के पलटने से 18 लोग घायल हो गए थे।
यह हादसा दरहाल-राजौरी सड़क पर हुआ था, जब वाहन चालक का नियंत्रण हट गया था। घायलों में से चार की हालत गंभीर बताई गई थी।
लगातार बढ़ रहे सड़क हादसे
जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रहे सड़क हादसे चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। पहाड़ी इलाकों में तेज रफ्तार और संकरी सड़कों के कारण ऐसे हादसे अक्सर सामने आते हैं।
प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।