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वैदिक सुविचार

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यथा भूमिः तथा तोयं,
यथा बीजं तथाङ्कुरः।
यथा देशः तथा भाषा,
यथा राजा तथा प्रजा॥
जैसी भूमि होती है, वैसा ही जल होता है। जैसा बीज होता है, वैसा ही अंकुर होता है। जैसा देश होता है, वहाँ के निवासियों की वैसी ही भाषा होती है। जैसा राजा होता है, प्रजा भी वैसी ही होती है।

As is the land, so is the water. As is the seed, so is the seedling. As is the country, so is the language of its inhabitants. As is the king, so are the subjects.

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