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बाबा बर्फानी क्यों कहलाते हैं महादेव?

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Lord Shiva Mythological Story: हिमालय की बर्फीली पर्वतमालाओं के बीच स्थित अमरनाथ धाम भगवान शिव के सबसे पवित्र तीर्थों में से एक माना जाता है। समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला हिम शिवलिंग सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहीं भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था। इसी कारण इस धाम का नाम अमरनाथ पड़ा और भगवान शिव यहां ‘बाबा बर्फानी’ के नाम से प्रसिद्ध हुए।

हर वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा से रक्षाबंधन तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय मार्ग तय कर बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। प्राकृतिक हिम शिवलिंग, उससे जुड़ी पौराणिक कथाएं और अमर कथा का महत्व इस धाम को अन्य शिव तीर्थों से अलग पहचान दिलाता है।

क्यों कहलाते हैं भगवान शिव ‘बाबा बर्फानी’?

अमरनाथ गुफा में स्थापित शिवलिंग किसी मनुष्य द्वारा निर्मित नहीं है। गुफा की छत से लगातार टपकने वाली जल की बूंदें अत्यधिक ठंड के कारण जमकर बर्फ का रूप ले लेती हैं और धीरे-धीरे एक विशाल हिम शिवलिंग का निर्माण करती हैं।

चूंकि यह शिवलिंग पूरी तरह बर्फ से निर्मित होता है, इसलिए यहां विराजमान भगवान शिव को श्रद्धापूर्वक ‘बाबा बर्फानी’ कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रावण मास में हिम शिवलिंग अपने पूर्ण आकार में होता है और चंद्रमा के घटने-बढ़ने के साथ इसका आकार भी बदलता रहता है।

अमरनाथ धाम का पौराणिक महत्व

पुराणों के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव से उनके अमर होने का रहस्य पूछा था। भगवान शिव ने बताया कि यह अत्यंत गोपनीय ज्ञान है, जिसे किसी अन्य जीव को नहीं सुनना चाहिए। इसलिए उन्होंने एक ऐसे निर्जन स्थान की तलाश की, जहां उनके अलावा कोई भी जीवित प्राणी मौजूद न हो।

इसी उद्देश्य से उन्होंने हिमालय की दुर्गम पर्वतमालाओं के बीच स्थित इस गुफा का चयन किया, जो आगे चलकर अमरनाथ धाम के नाम से प्रसिद्ध हुई।

अमर कथा सुनाने से पहले क्यों छोड़े अपने सभी प्रतीक?

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने गुफा तक पहुंचने के मार्ग में अपने सभी प्रतीकों और साथियों को अलग-अलग स्थानों पर छोड़ दिया, ताकि कोई भी उनके पीछे गुफा तक न पहुंच सके।

पहलगाम में अपने वाहन नंदी को छोड़ा।

चंदनवाड़ी में मस्तक का चंद्रमा उतारा।

शेषनाग में गले के नागों को छोड़ा।

महागुणस पर्वत के पास श्रीगणेश को विराम दिया।

पंचतरणी में पांच तत्व—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—का त्याग किया।

आज भी अमरनाथ यात्रा का पारंपरिक मार्ग इन्हीं पवित्र स्थलों से होकर गुजरता है।

गुफा में प्रवेश से पहले क्यों प्रज्वलित की अग्नि?

मान्यता है कि अमर कथा सुनाने से पहले भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख से अग्नि प्रकट की, जिससे गुफा और उसके आसपास मौजूद सभी जीव-जंतु भस्म हो गए। ऐसा इसलिए किया गया ताकि अमरत्व का रहस्य केवल माता पार्वती तक ही सीमित रहे।

इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती गुफा में विराजमान हुए और अमर कथा का आरंभ हुआ।

क्या है अमर कथा?

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने माता पार्वती को आत्मा की अमरता, जन्म-मृत्यु के चक्र और सृष्टि के गूढ़ रहस्यों का ज्ञान दिया। इसी दिव्य ज्ञान को अमर कथा कहा जाता है।

कहा जाता है कि इस कथा को सुनने वाला सामान्य जीव भी मृत्यु के बंधन से मुक्त हो सकता था। यही कारण था कि भगवान शिव इस रहस्य को अत्यंत गोपनीय रखना चाहते थे।

अमरनाथ के अमर कबूतरों की कथा

अमरनाथ धाम से जुड़ी एक प्रसिद्ध मान्यता दो कबूतरों की भी है। कहा जाता है कि भगवान शिव द्वारा प्रज्वलित अग्नि के बावजूद एक कबूतर का जोड़ा किसी प्रकार बच गया और उसने अमर कथा सुन ली।

मान्यता है कि कथा सुनने के कारण वह जोड़ा अमर हो गया। आज भी गुफा में दिखाई देने वाले कबूतरों के जोड़े को वही दिव्य युगल माना जाता है और श्रद्धालु उनके दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं।

हिम शिवलिंग बनने का धार्मिक रहस्य

अमरनाथ गुफा में बनने वाला हिम शिवलिंग भगवान शिव की स्वयंभू उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है। गुफा की छत से गिरने वाली जलधारा अत्यधिक ठंड के कारण जमकर प्राकृतिक रूप से शिवलिंग का आकार ग्रहण करती है।

मुख्य हिम शिवलिंग के समीप कई बार दो छोटे हिम स्तंभ भी बनते हैं, जिन्हें माता पार्वती और भगवान गणेश का स्वरूप माना जाता है। श्रद्धालु इन तीनों हिम आकृतियों के दर्शन को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी मानते हैं।

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