जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शनिवार (4 जुलाई, 2026) को एक आधिकारिक गजट अधिसूचना जारी कर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत पाकिस्तान में सक्रिय 23 लोगों को ‘आतंकवादी’ घोषित कर दिया।
गृह मंत्रालय के अनुसार, ये सभी व्यक्ति पाकिस्तान से संचालित होकर लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के लिए काम कर रहे थे। इन पर जम्मू-कश्मीर में आतंकी भर्ती, घुसपैठ, प्रशिक्षण, ड्रोन के जरिए हथियार पहुंचाने और आतंकी हमलों की साजिश रचने के आरोप हैं।
हाफिज सईद के करीबी सहयोगी भी सूची में शामिल
गृह मंत्रालय के मुताबिक, घोषित किए गए 23 आतंकियों में तीन लोग लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज़ मुहम्मद सईद के करीबी सहयोगी बताए गए हैं। इनमें अब्दुल रऊफ, हाफिज खालिद वलीद और राणा इफ्तिखार के नाम शामिल हैं।
अधिसूचना के अनुसार, राणा इफ्तिखार पर विभिन्न आतंकी संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करने और युवाओं को आतंकी गतिविधियों के लिए उकसाने का आरोप है। वहीं अब्दुल रऊफ पर लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा के लिए फंड जुटाने, आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने और उनका समन्वय करने के आरोप लगाए गए हैं।
नगरोटा और सुंजवान हमलों से जुड़े नाम भी शामिल
गृह मंत्रालय के अनुसार, घोषित आतंकियों में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनका नाम जम्मू-कश्मीर में हुए बड़े आतंकी हमलों से जुड़ा रहा है।
सरकार के मुताबिक, तीन लोगों पर वर्ष 2016 के नगरोटा आर्मी कैंप हमले में भूमिका निभाने का आरोप है, जबकि दो अन्य के नाम वर्ष 2018 के सुंजवान सैन्य स्टेशन पर हुए आतंकी हमले से जुड़े बताए गए हैं।
इन आतंकियों पर क्या हैं आरोप?
अधिसूचना में कई आतंकियों की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है।
मसूद इलियास कश्मीरी (JeM) पर सुंजवान आर्मी कैंप हमले की साजिश में शामिल होने का आरोप है।
मुहम्मद मुसद्दिक (JeM) पर घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों के समन्वय का आरोप लगाया गया है।
मुफ्ती मोहम्मद असगर खान को नगरोटा हमले से जुड़े घुसपैठ नेटवर्क का प्रमुख संचालक बताया गया है।
हाफिज अब्दुल शकूर पर नगरोटा हमले से पहले स्थानीय नेटवर्क के जरिए घुसपैठ में मदद करने का आरोप है।
अब्दुल्ला जिहादी (शाहनवाज/अल हिजामा) पर नगरोटा हमले में शामिल आतंकियों की सहायता करने और जैश के प्रशिक्षण शिविर संचालित करने के आरोप हैं।
फिरदौस अहमद भट (LeT) को लश्कर का कथित ‘लॉन्चिंग कमांडर’ बताते हुए घुसपैठ और लॉजिस्टिक सपोर्ट से जोड़कर देखा गया है।
बिलाल अहमद मीर उर्फ अहमद भाई (LeT/TRF) पर सीमा पार आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने और हथियारों की आपूर्ति में भूमिका निभाने का आरोप है।
सरकार ने गिनाई आतंकियों की गतिविधियां
गृह मंत्रालय का कहना है कि अधिसूचना में शामिल सभी 23 लोग आतंकियों की भर्ती, प्रशिक्षण, फंडिंग, हथियारों की आपूर्ति, सीमा पार घुसपैठ और आतंकी हमलों की साजिश जैसी गतिविधियों में कथित रूप से शामिल रहे हैं।
सरकार के अनुसार, इन लोगों को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित करने का उद्देश्य सीमा पार संचालित आतंकी नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करना और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को समर्थन देने वाले तंत्र को कमजोर करना है।
सुरक्षा एजेंसियों की लगातार निगरानी
केंद्र सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब सुरक्षा और जांच एजेंसियां सीमा पार सक्रिय आतंकी नेटवर्क पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। एजेंसियों के अनुसार, इन नेटवर्क पर ड्रोन, एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों और ऑनलाइन भर्ती प्लेटफॉर्म के जरिए जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप हैं।