आम आदमी पार्टी (AAP) इस समय बड़े संकट से गुजर रही है। गुजरात दौरे से लौटते ही वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया सीधे अरविंद केजरीवाल के आवास पहुंचे। देर रात हुई करीब आधे घंटे की बैठक में राज्यसभा के सात सांसदों के पार्टी छोड़ने और आगामी पंजाब चुनाव से पहले रणनीति पर चर्चा की गई।
इमरजेंसी मीटिंग में क्या हुआ
न्यूज़ एजेंसी ANI के मुताबिक, सिसोदिया एयरपोर्ट से सीधे केजरीवाल के घर पहुंचे, जहां दोनों नेताओं ने पार्टी में आई फूट और उसके असर पर गंभीर मंथन किया। साथ ही, भविष्य की रणनीति तय करने पर भी चर्चा हुई।
7 सांसदों के जाने से बड़ा झटका
AAP के सात राज्यसभा सांसद—राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल—ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है।
AAP ने इसे “पंजाब के साथ विश्वासघात” बताते हुए BJP पर केंद्रीय एजेंसियों के जरिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की तैयारी
पार्टी अब इन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रही है। AAP के मुख्य सचेतक एनडी गुप्ता के जरिए राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र भेजने की तैयारी है।
इसमें दलबदल विरोधी कानून के तहत राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा सकती है, क्योंकि इन्हें सार्वजनिक रूप से BJP में शामिल होते देखा गया।
राज्यसभा में AAP की स्थिति कमजोर
इस घटनाक्रम का सीधा असर राज्यसभा में पार्टी की ताकत पर पड़ा है। AAP की सीटें 10 से घटकर सिर्फ 3 रह गई हैं, जिससे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को मजबूती मिली है।
चुनाव से पहले बढ़ी चिंता
यह संकट ऐसे समय आया है, जब AAP पंजाब, गोवा और गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही है। खासतौर पर पंजाब में पार्टी का विस्तार इन नेताओं के दम पर हुआ था, लेकिन उनके जाने से बड़ा खालीपन पैदा हो सकता है।
भविष्य की राह पर सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या AAP इस संकट से उबरकर अपने विस्तार की रणनीति को जारी रख पाएगी, या फिर उसे अपने मौजूदा गढ़ों तक ही सीमित रहना पड़ेगा।