आम आदमी पार्टी (AAP) के इतिहास में शुक्रवार का दिन एक बड़े राजनीतिक संकट के रूप में सामने आया। कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले राघव चड्ढा ने अपने साथ 7 राज्यसभा सांसदों के समूह के साथ पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। यह केवल दलबदल नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही सत्ता की खींचतान, अविश्वास और दबाव का परिणाम माना जा रहा है। इस घटनाक्रम ने AAP के अंदर की गहरी दरारों को उजागर कर दिया।
विवाद की शुरुआत: स्वाति मालीवाल मामला
इस संकट की जड़ें 2024 में उस समय से जुड़ी हैं, जब राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया कि 13 मई को केजरीवाल के आवास पर उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। इस घटना ने पार्टी के भीतर असंतोष और अविश्वास का माहौल बना दिया, जिसने धीरे-धीरे बड़े विवाद का रूप ले लिया।
राघव चड्ढा तक कैसे पहुंचा मामला
मालीवाल विवाद के बाद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे। इसी बीच राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटा दिया गया, जिससे संकेत मिल गया था कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है। धीरे-धीरे कई नेताओं के असंतोष की खबरें सामने आने लगीं।
7 सांसदों का सामूहिक इस्तीफा
शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने 7 सांसदों के पार्टी छोड़ने की पुष्टि की। इसमें अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और संदीप पाठक जैसे नाम शामिल बताए गए। इन नेताओं का एक साथ जाना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
ED कार्रवाई से बढ़ा दबाव
अशोक मित्तल के इस्तीफे से पहले उनके ठिकानों और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी हुई। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े मामले में की गई थी।
AAP नेता संजय सिंह ने इसे भाजपा के “ऑपरेशन लोटस” का हिस्सा बताते हुए दावा किया कि नेताओं ने दबाव में आकर पार्टी छोड़ी।
AAP में राघव चड्ढा का सफर
राघव चड्ढा पार्टी के उभरते चेहरों में से एक थे और 2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद बने। पंजाब में AAP की जीत के बाद उनका प्रभाव काफी बढ़ा और वे भगवंत मान के बाद राज्य के प्रमुख नेताओं में गिने जाने लगे।
गिरफ्तारी के बाद बदली स्थिति
2024 में आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद पार्टी के भीतर समीकरण तेजी से बदले। चड्ढा की कई अहम मौकों पर अनुपस्थिति और उनकी चुप्पी को लेकर सवाल उठे। इसके बाद उन्हें धीरे-धीरे अहम पदों से हटाया जाने लगा।
उप-नेता पद से हटाना बना टर्निंग पॉइंट
इस संकट का तात्कालिक कारण तब सामने आया, जब चड्ढा को राज्यसभा में AAP के उप-नेता पद से हटा दिया गया। उन्होंने पहले ही संकेत दे दिया था कि वे सही समय पर जवाब देंगे, और सांसदों के सामूहिक इस्तीफे के साथ यह स्पष्ट हो गया।
मालीवाल के गंभीर आरोप
स्वाति मालीवाल ने अपने बयान में पार्टी छोड़ने के पीछे भ्रष्टाचार, महिलाओं के उत्पीड़न और नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी में गलत तत्वों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
चुनाव से पहले AAP को बड़ा झटका
इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब, गुजरात और गोवा जैसे राज्यों में होने वाले आगामी चुनावों से पहले AAP की स्थिति को कमजोर कर दिया है। पार्टी के भीतर का यह खुला विभाजन उसकी राजनीतिक संभावनाओं पर बड़ा असर डाल सकता है।