मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का मामला अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। इस मुद्दे पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने बड़ा बयान देते हुए दावा किया कि यह कोई प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर चल रही गहरी अंतर्कलह और अविश्वास का परिणाम है।
सारंग के बयान के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और राज्यसभा चुनाव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
विश्वास सारंग का बड़ा आरोप
विश्वास सारंग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेता कथित तौर पर एक आपराधिक मामले से जुड़े नोटिस की फोटोकॉपी खुद ही प्रसारित कर रहे थे, ताकि नामांकन प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके और बाद में इसे विवाद का मुद्दा बनाया जा सके।
उन्होंने दावा किया कि नामांकन रद्द होना किसी तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटि का परिणाम नहीं था, बल्कि कांग्रेस की आंतरिक रणनीति और संगठनात्मक असंतोष से जुड़ा मामला है।
कांग्रेस में अंदरूनी कलह का दावा
सारंग ने कहा कि कांग्रेस के भीतर अपने ही नेताओं और विधायकों को लेकर भरोसे का संकट दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व को अपने विधायकों द्वारा संभावित क्रॉस-वोटिंग की आशंका थी, जिसके चलते नामांकन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों में कथित तौर पर गड़बड़ी की गई।
उनका दावा था कि यह कदम राजनीतिक नुकसान और सार्वजनिक शर्मिंदगी से बचने के उद्देश्य से उठाया गया हो सकता है।
क्रॉस-वोटिंग को लेकर उठे सवाल
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को पहले से अंदेशा था कि उसके कुछ विधायक पार्टी लाइन से अलग मतदान कर सकते हैं। इसी वजह से पार्टी के भीतर तनाव और असंतोष की स्थिति बनी हुई थी।
हालांकि, इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से अलग रुख सामने आया है और पार्टी ने भाजपा के दावों को खारिज किया है।
चुनाव आयोग पर कांग्रेस का हमला
नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का आरोप है कि नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और नियमों के अनुपालन को लेकर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया गया।
कांग्रेस ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग भी की है।
भाजपा ने पहले भी जताई थी आपत्ति
भारतीय जनता पार्टी ने मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी पर पहले ही आपत्ति दर्ज कराई थी। भाजपा का आरोप था कि नामांकन पत्र और संबंधित दस्तावेजों में कुछ विसंगतियां मौजूद थीं तथा आवश्यक जानकारियों का पूरा खुलासा नहीं किया गया था।
इसी आधार पर पार्टी ने नामांकन की वैधता पर सवाल उठाए थे।
राज्यसभा चुनाव का गणित बदला
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद राज्यसभा चुनाव का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। अब भाजपा के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना मजबूत मानी जा रही है।
यदि ऐसा होता है तो भाजपा मध्य प्रदेश से राज्यसभा की सभी तीन सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है।
राजनीतिक बहस तेज
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ भाजपा इसे कांग्रेस की अंदरूनी कमजोरी और अव्यवस्था का परिणाम बता रही है, वहीं कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया और संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है।
आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है, क्योंकि दोनों दल इस मुद्दे को लेकर आमने-सामने नजर आ रहे हैं।