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PoK बनाम जम्मू-कश्मीर: ज़ोजिला टनल से दिखा विकास का फर्क

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लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के दोनों ओर पिछले 24 घंटों में सामने आई घटनाओं ने कश्मीर के दो हिस्सों की अलग-अलग वास्तविकताओं को उजागर कर दिया है। एक तरफ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विरोध प्रदर्शन, हिंसा और प्रशासनिक तनाव देखने को मिल रहा है, तो दूसरी ओर भारतीय क्षेत्र में ज़ोजिला टनल जैसी ऐतिहासिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना की सफलता का जश्न मनाया जा रहा है।

13.15 किलोमीटर लंबी ज़ोजिला टनल के पूरा होने पर यह एशिया की सबसे लंबी द्विदिश (Bidirectional) सड़क सुरंगों में शामिल होगी और जम्मू-कश्मीर को सालभर लद्दाख से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी।

PoK में विरोध, हिंसा और बढ़ता असंतोष

9 जून को रावलकोट, मुज़फ्फराबाद और मीरपुर सहित कई शहरों में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। प्रतिबंधित ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) द्वारा घोषित ‘लॉन्ग मार्च’ को रोकने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए।

रावलकोट में हुई झड़पों में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 11 लोगों की मौत हुई, जबकि स्थानीय कार्यकर्ताओं ने इससे अधिक हताहत होने का दावा किया। क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया।

वर्षों से सुलग रहा है असंतोष

2024: महंगाई के खिलाफ आंदोलन

आटे और बिजली की बढ़ती कीमतों के विरोध में व्यापक प्रदर्शन हुए। कई जगह हिंसा हुई और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में चार लोगों की मौत हो गई।

2025: JAAC का बड़ा आंदोलन

सब्सिडी, बिजली दरों और राजनीतिक अधिकारों की मांग को लेकर चक्का जाम और बंद का आयोजन किया गया। इस दौरान हुई हिंसा में कई लोगों की जान गई।

2026: राजनीतिक प्रतिनिधित्व बना नया मुद्दा

गैर-निवासियों के लिए 12 सीटें आरक्षित किए जाने के फैसले के बाद विरोध और तेज हो गया। स्थानीय लोग इसे अपने अधिकारों और संसाधनों पर हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं।

भारत में विकास की नई पहचान बनी ज़ोजिला टनल

जहां PoK में विरोध प्रदर्शन जारी हैं, वहीं भारत ने ज़ोजिला टनल परियोजना में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में सुरंग के दोनों सिरों का सफलतापूर्वक मिलान (ब्रेकथ्रू) पूरा हुआ।

करीब 11,500 फीट की ऊंचाई पर बन रही यह सुरंग कश्मीर और लद्दाख के बीच सालभर संपर्क सुनिश्चित करेगी। अभी भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों में ज़ोजिला दर्रा कई महीनों तक बंद रहता है।

क्या बदलेगा ज़ोजिला टनल से?

कश्मीर और लद्दाख के बीच यात्रा समय में कमी आएगी।

सर्दियों में भी संपर्क बना रहेगा।

पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

सेना और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

ज़ोजिला टनल के 2028 तक पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है।

जम्मू-कश्मीर में इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार

पिछले एक दशक में जम्मू-कश्मीर में कई बड़ी परियोजनाएं पूरी हुई हैं या निर्माणाधीन हैं।

प्रमुख परियोजनाएं

ज़ेड-मोड़ (Z-Morh) टनल

चिनाब रेल ब्रिज

जम्मू-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक

नए राष्ट्रीय राजमार्ग

सीमा सड़क परियोजनाएं

डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार

इन परियोजनाओं ने क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी है।

निवेश और उद्यमिता में बढ़ोतरी

जम्मू-कश्मीर में निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

2020 में केवल 69 पंजीकृत स्टार्टअप थे।

2025-26 तक यह संख्या 1,300 से अधिक हो गई।

सरकार ने 2027 तक 2,000 स्टार्टअप का लक्ष्य रखा है।

पर्यटन, परिवहन और सेवा क्षेत्र में नए अवसर पैदा हुए हैं।

दो व्यवस्थाएं, दो अलग तस्वीरें

LoC के दोनों ओर की हालिया घटनाएं केवल दो अलग खबरें नहीं हैं, बल्कि दो अलग प्रशासनिक और विकास मॉडल की झलक भी पेश करती हैं।

एक ओर PoK में महंगाई, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक नीतियों को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा है, जबकि दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सड़क, रेल, सुरंग और निवेश परियोजनाओं के जरिए विकास को गति देने का प्रयास जारी है।

9 जून की दो तस्वीरें

एक तरफ रावलकोट की सड़कों पर प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बल आमने-सामने थे, तो दूसरी ओर ज़ोजिला टनल के भीतर इंजीनियर और श्रमिक ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू का जश्न मना रहे थे।

यही वजह है कि LoC के दोनों ओर की तस्वीरें आज पूरी तरह अलग कहानी बयां करती नजर आ रही हैं—एक ओर असंतोष और संघर्ष, तो दूसरी ओर विकास और कनेक्टिविटी की नई उम्मीद।

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