पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी अंदरूनी असंतोष अब राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में कथित तौर पर बागी नेताओं के समर्थन में विधायकों के लामबंद होने की चर्चाओं के बीच अब राज्यसभा में भी पार्टी को बड़ा झटका लगा है।
वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय के राज्यसभा से इस्तीफे के एक सप्ताह बाद ही टीएमसी सांसद सुष्मिता देव ने भी उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। लगातार दो बड़े नेताओं के इस्तीफे ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
सुष्मिता देव का राजनीतिक सफर
सुष्मिता देव पूर्वोत्तर भारत की प्रमुख महिला नेताओं में गिनी जाती हैं और राष्ट्रीय राजनीति में भी उनकी पहचान मजबूत रही है।
कांग्रेस से की थी राजनीति की शुरुआत
सुष्मिता देव ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी। वह असम की सिलचर लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं और लंबे समय तक कांग्रेस का प्रमुख चेहरा मानी जाती थीं।
2021 में TMC में हुईं शामिल
2019 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस नेतृत्व से मतभेदों के चलते उन्होंने वर्ष 2021 में पार्टी छोड़ दी और तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया।
TMC में मिला अहम दायित्व
ममता बनर्जी ने पूर्वोत्तर भारत में पार्टी के विस्तार की रणनीति के तहत सुष्मिता देव को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपीं। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया और बाद में राज्यसभा भेजकर संगठन में उनका कद और बढ़ाया गया।
इस्तीफे के राजनीतिक मायने
सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रहे इस्तीफे पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन सकते हैं।
एक सप्ताह में दूसरा बड़ा इस्तीफा
सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के बाद सुष्मिता देव का राज्यसभा छोड़ना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर कुछ स्तर पर असंतोष मौजूद है। इससे संसद में टीएमसी की रणनीति और संगठनात्मक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।
संगठनात्मक चुनौतियां बढ़ीं
बंगाल की राजनीति में पहले से चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच यह घटनाक्रम पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती बनकर सामने आया है। विपक्षी दल भी इसे टीएमसी के भीतर बढ़ते मतभेदों से जोड़कर देख रहे हैं।
आगे क्या होगा?
सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वह भविष्य में किस राजनीतिक दिशा का चयन करेंगी।
हालांकि, अभी तक उनकी ओर से आगे की रणनीति को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, आगामी संसद सत्र से पहले टीएमसी के लिए यह घटनाक्रम राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
TMC के सामने नई चुनौती
लगातार दो वरिष्ठ नेताओं के राज्यसभा से इस्तीफे ने तृणमूल कांग्रेस के लिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पार्टी नेतृत्व के सामने संगठन को एकजुट रखने और बढ़ते असंतोष को नियंत्रित करने की चुनौती होगी। आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति और नेताओं की प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।