राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक गेस्ट हाउस में लगी भीषण आग, जिसमें 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, अब केवल होटल प्रबंधन की लापरवाही तक सीमित मामला नहीं रह गया है। जांच आगे बढ़ने के साथ ही दिल्ली की लाइसेंसिंग और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
प्रारंभिक जांच में जहां होटल मालिकों और कर्मचारियों की भूमिका पर फोकस था, वहीं अब यह जांच इस दिशा में बढ़ रही है कि सुरक्षा मानकों और दस्तावेजी नियमों में कथित खामियों के बावजूद संस्थान को संचालन की अनुमति कैसे मिली। 3 जून को ‘फ्लोरिश स्टे B&B’ में लगी आग हाल के वर्षों में राजधानी की सबसे भयावह होटल अग्निकांड घटनाओं में गिनी जा रही है।
कर्मचारी के दस्तावेजों पर लाइसेंस लेने का आरोप
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, होटल के अकाउंटेंट जय मिश्रा ने पुलिस को बताया कि उन्होंने मालिक लवकेश बजाज के कहने पर बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) लाइसेंस के लिए अपने व्यक्तिगत दस्तावेज उपलब्ध कराए थे।
बताया जा रहा है कि लाइसेंस आवेदन की पूरी प्रक्रिया होटल मालिक द्वारा संभाली गई थी। जय मिश्रा को कथित तौर पर लगभग 35 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता था।
इस खुलासे के बाद बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि संपत्ति और व्यवसाय का नियंत्रण किसी अन्य व्यक्ति के पास था, तो कर्मचारी के नाम पर लाइसेंस कैसे स्वीकृत किया गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि लाइसेंस जारी करने से पहले आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया पूरी की गई थी या नहीं।
लाइसेंसिंग और निगरानी प्रक्रिया पर उठे सवाल
मामले में सामने आई नई जानकारियों ने उन सरकारी एजेंसियों और विभागों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जो ऐसे संस्थानों को अनुमति देने और उनकी निगरानी करने के लिए जिम्मेदार हैं।
अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि स्वामित्व, संचालन और दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी में किसी प्रकार का विरोधाभास होने के बावजूद उसे पहले क्यों नहीं चिन्हित किया गया।
क्या समय-समय पर हुआ था निरीक्षण?
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि संबंधित विभागों द्वारा होटल का नियमित निरीक्षण किया गया था या नहीं।
अधिकारियों का मानना है कि यदि सुरक्षा मानकों और नियमों का समय-समय पर सत्यापन किया गया होता, तो संभावित खामियां पहले ही सामने आ सकती थीं। इसी कारण अब निरीक्षण व्यवस्था और अनुपालन तंत्र की भी समीक्षा की जा रही है।
होटल संचालन में अकाउंटेंट की भूमिका की जांच
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि जय मिश्रा केवल लेखा-जोखा तक सीमित नहीं थे, बल्कि होटल के दैनिक संचालन में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
जांचकर्ताओं के अनुसार, वे स्टाफ प्रबंधन, अतिथि रिकॉर्ड, प्रशासनिक कार्यों और लाइसेंस से जुड़े दस्तावेजों का भी काम देखते थे। इसके अलावा सुरक्षा मानकों के अनुपालन और आवश्यक रिकॉर्ड के रखरखाव की जिम्मेदारी भी उनके पास होने की बात सामने आई है।
रिकॉर्ड नष्ट होने के दावे की पड़ताल
पूछताछ के दौरान जय मिश्रा ने दावा किया कि आग लगने की घटना में गेस्ट रजिस्टर, पहचान संबंधी दस्तावेज, लाइसेंस रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण कागजात नष्ट हो गए।
हालांकि, जांच एजेंसियां केवल इस दावे पर निर्भर नहीं हैं। पुलिस अब विभिन्न सरकारी विभागों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अन्य स्रोतों से रिकॉर्ड जुटाकर पूरे मामले की पड़ताल कर रही है।
अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं सुरक्षा नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के उल्लंघन को नजरअंदाज तो नहीं किया गया था।
अब जांच के केंद्र में जवाबदेही का सवाल
हालांकि होटल मालिक और प्रबंधन की आपराधिक जिम्मेदारी की जांच जारी है, लेकिन अब मामला व्यापक प्रशासनिक जवाबदेही तक पहुंच गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नियमों में खामियां थीं, तो संबंधित एजेंसियों ने उन्हें समय रहते क्यों नहीं पकड़ा। साथ ही यह भी जांच का विषय बन गया है कि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाने वाले विभागों ने अपनी भूमिका कितनी प्रभावी ढंग से निभाई।
जांच के सामने सबसे बड़ा प्रश्न
मामले में अब केवल यह सवाल नहीं रह गया है कि होटल का संचालन कौन कर रहा था, बल्कि यह भी पूछा जा रहा है कि उसे संचालन की अनुमति किस आधार पर मिली। लाइसेंसिंग प्रक्रिया में कथित कमियां कैसे रह गईं और सुरक्षा नियमों के पालन की निगरानी क्यों नहीं हो सकी।
इन्हीं सवालों के जवाब अब इस बहुचर्चित अग्निकांड की जांच की दिशा तय करेंगे।