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मोदी बने देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित PM, NDA करेगा सम्मान

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भारतीय राजनीति के इतिहास में बुधवार का दिन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले नेता बन गए हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल के 4,399 दिन पूरे कर लिए हैं और इस मामले में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी लगातार तीन आम चुनावों में जनादेश प्राप्त कर सत्ता में लौटे हैं और बिना किसी अंतराल के देश का नेतृत्व कर रहे हैं।

लगातार जनादेश के साथ बना नया रिकॉर्ड

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू अगस्त 1947 से मई 1964 तक इस पद पर रहे थे। हालांकि उनके कार्यकाल में स्वतंत्रता के बाद का वह दौर भी शामिल था, जब देश में आम चुनाव नहीं हुए थे।

वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने करीब 16 वर्षों तक देश का नेतृत्व किया, लेकिन उनका कार्यकाल दो अलग-अलग चरणों में बंटा हुआ था। ऐसे में लगातार लोकतांत्रिक जनादेश के आधार पर प्रधानमंत्री पद संभालने के मामले में नरेंद्र मोदी अब शीर्ष स्थान पर पहुंच गए हैं।

12 वर्षों में मजबूत हुआ भाजपा का राजनीतिक आधार

प्रधानमंत्री मोदी की यह उपलब्धि केंद्र में उनके 12 वर्षों से अधिक के नेतृत्व को भी रेखांकित करती है। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी स्थिति को और मजबूत किया तथा कई नए राज्यों और क्षेत्रों में अपना जनाधार बढ़ाया।

हाल के विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन ने भी पार्टी का उत्साह बढ़ाया है। पार्टी नेतृत्व इसे जनता के भरोसे और सरकार की नीतियों के प्रति समर्थन का संकेत मान रहा है।

NDA की बैठक में होगा सम्मान

इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के वरिष्ठ नेताओं की एक विशेष बैठक आयोजित की जा रही है।

72 नेता होंगे शामिल

बैठक में गठबंधन के 72 प्रमुख नेताओं के शामिल होने की संभावना है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व, सुशासन और विकास संबंधी दृष्टिकोण की सराहना करते हुए एक विशेष अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया जाएगा।

विकास और वैश्विक पहचान पर जोर

गठबंधन के सहयोगी दल बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल क्रांति और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना करेंगे।

पीएम मोदी ने देशवासियों को दिया श्रेय

इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास और समर्थन का परिणाम बताया।

उन्होंने कहा कि सरकार ने ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ युवाओं, महिलाओं, किसानों और श्रमिकों के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम किया है। उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को इस यात्रा की प्रमुख उपलब्धियां बताया।

लगातार तीन बार बने प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी जीत हासिल की और लगातार तीसरी बार देश की कमान संभाली।

सुशासन और सुधारों के 12 वर्ष

भाजपा नेताओं ने सरकार के पिछले 12 वर्षों को सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन का दौर बताया है।

सामाजिक और आर्थिक योजनाओं पर जोर

सरकार ने वित्तीय समावेशन, आवास, स्वास्थ्य और स्वरोजगार से जुड़ी कई योजनाएं लागू कीं। आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुद्रा योजना, स्वच्छ भारत अभियान और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं को प्रमुख उपलब्धियों में गिना गया।

आर्थिक क्षेत्र में बढ़ी ताकत

सरकार का दावा है कि भारत ने निर्यात, विनिर्माण और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में भी देश की क्षमता बढ़ी है।

रणनीतिक फैसलों की चर्चा

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने, आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने जैसे फैसलों को भी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया जा रहा है।

वैश्विक नेताओं ने दी बधाई

प्रधानमंत्री मोदी की इस उपलब्धि पर कई देशों के नेताओं ने भी बधाई संदेश भेजे हैं।

श्रीलंका के राष्ट्रपति का संदेश

श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने इसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में जनता के भरोसे और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण बताया।

पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया

पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने प्रधानमंत्री मोदी को वैश्विक नेतृत्व का रोल मॉडल बताते हुए कहा कि भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति दुनिया के लिए प्रेरणादायक है।

नए भारत की कहानी

प्रधानमंत्री मोदी का 12 वर्षों से अधिक का यह कार्यकाल केवल राजनीतिक स्थिरता का प्रतीक नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका, विकास और नेतृत्व क्षमता से भी जोड़ा जा रहा है। यही वजह है कि यह उपलब्धि भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण अध्यायों में शामिल हो गई है।

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