चेन्नई, 4 नवंबर। तमिलनाडु सरकार ने आगामी दीपावली के त्योहार को देखते हुए पटाखों और आतिशबाजी के इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं। राज्य प्रशासन की ओर से मंगलवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस साल दीपावली पर नागरिकों को पटाखे जलाने के लिए केवल दो घंटे का समय दिया गया है। इसके तहत सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और शाम 7 बजे से 8 बजे तक ही आतिशबाजी की अनुमति होगी।
सरकार ने यह फैसला राज्य में वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया है।
सुबह और शाम एक-एक घंटे ही जला सकेंगे पटाखे
सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, दीपावली के दिन पटाखे जलाने की अनुमति केवल दो निर्धारित समयावधियों में होगी। पहली समयावधि सुबह 6 से 7 बजे तक और दूसरी शाम 7 से 8 बजे तक रहेगी।
इस प्रतिबंध का उद्देश्य त्योहार के दौरान बढ़ने वाले प्रदूषण को कम करना और नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।
पर्यावरण के अनुकूल दीपावली मनाने की अपील
सरकारी विज्ञप्ति में पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया गया है। इसमें नागरिकों से अपील की गई है कि वे ध्वनि और वायु प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों के बजाय पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को अपनाएं।
विज्ञप्ति में कहा गया, “दीपावली रोशनी और पारिवारिक खुशियों का त्योहार है, जिसे प्रकृति के अनुकूल मनाया जाना चाहिए। हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि वे ध्वनि और वायु प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों के बजाय पर्यावरण के अनुकूल तरीके चुनकर इस दिन को मनाएं।”
प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर चिंता
सरकार का यह कदम भूमि, जल और वायु प्रदूषण को रोकने के प्रयासों का हिस्सा है। पटाखों से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है, जबकि तेज आवाज से लोगों की सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंच सकता है।
पिछले वर्षों में त्योहारों के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में गिरावट और सर्दियों के मौसम में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए भी ऐसे प्रतिबंधों की जरूरत महसूस की गई है। ठंड के मौसम में हवा में प्रदूषक तत्वों के जमा होने से सांस संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
परंपरा के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर
तमिलनाडु सरकार का यह फैसला धार्मिक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। पटाखों के सीमित इस्तेमाल से संभावित दुर्घटनाओं और आपातकालीन स्वास्थ्य समस्याओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
सरकार ने नागरिकों से नियमों का पालन करने और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से दीपावली मनाने की अपील की है, ताकि रोशनी का यह पर्व खुशियों और सुरक्षा के साथ मनाया जा सके।







